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होर्मुज में ईरान की नौसेना पर अमेरिका का वार, ट्रंप बोले- 58 जहाज और बारूदी नावों को किया नष्ट

March 12, 2026

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना (US Army)  ने ईरान की नौसैनिक ताकत पर बड़ा हमला किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के कई जहाज और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नावों को नष्ट कर दिया गया है। उनका कहना है कि यह कदम वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।


  • ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत निर्णायक सैन्य कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत की जा रही है। ट्रंप के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य ईरान से पैदा हो रहे खतरे को खत्म करना है। उनका दावा है कि अमेरिकी सेना ने कम समय में ही ईरान की कई सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

    होर्मुज में ईरान की नौसेना पर हमला क्यों हुआ?
    ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी सेना को जानकारी मिली थी कि ईरान समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा है। इन सुरंगों का मकसद जहाजों को नुकसान पहुंचाना और समुद्री रास्तों को बाधित करना था। उन्होंने कहा कि इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की। ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी हमलों में ईरान के कई माइन बिछाने वाले जहाज और नौसैनिक पोत नष्ट कर दिए गए हैं।

    कितने जहाज और नावें नष्ट करने का दावा किया गया?
    ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज क्षेत्र में ईरान के कुल 58 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया है। इसके अलावा बारूदी सुरंग बिछाने वाली कम से कम 31 नावों को भी खत्म किया गया है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई बेहद तेजी से की गई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने विशेष तकनीक और हथियारों का इस्तेमाल करते हुए इन जहाजों को निशाना बनाया।

    क्या ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई?
    ट्रंप ने दावा किया कि पिछले 11 दिनों की सैन्य कार्रवाई में ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा झटका लगा है। उनके मुताबिक ईरान की वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसके रडार सिस्टम भी नष्ट हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइल क्षमता लगभग 90 प्रतिशत और ड्रोन क्षमता करीब 85 प्रतिशत तक कमजोर हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी सेना ईरान के हथियार बनाने वाले कारखानों को भी निशाना बना रही है।

    तेल बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर पड़ा?
    ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता आई है। इसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने दुनिया के विभिन्न देशों के रणनीतिक भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। ट्रंप के मुताबिक इससे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखा जा सकेगा।

    क्या अमेरिका युद्ध को आगे बढ़ाने के संकेत दे रहा है?
    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस संघर्ष को अधूरा नहीं छोड़ेगा। उनका कहना है कि अगर खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया तो भविष्य में फिर से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाती रहेगी और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखेगी।

    क्षेत्रीय और वैश्विक असर कितना बड़ा है?
    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

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