
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) का असर भारत (India) की रसोई गैस (LPG) पर! सरकार ने घरेलू LPG बुकिंग के नियम बदले और कमर्शियल गैस (Commercial Gas) की आपूर्ति सीमित कर दी है। कालाबाजारी रोकने के उपाय और गैस संकट से निपटने का पूरा सरकारी प्लान यहां विस्तार से पढ़ें।
हालिया वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने एक बार फिर दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) उपभोक्ता है और अपनी कुल खपत का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है, जो मुख्य रूप से मध्य पूर्व के देशों से आता है। अगर वैश्विक सप्लाई चेन किसी कारणवश पूरी तरह ठप्प हो जाती है, तो यह भारत की रसोई से लेकर अर्थव्यवस्था तक पर सीधा असर डालेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत के पास कोई ‘प्लान बी’ है? आइए विस्तार से समझते हैं कि भारत के पास क्या विकल्प हैं और सरकार किन चीजों को तेजी से बढ़ावा दे रही है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण देश में एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास समुद्री यातायात रुकने से भारत का एलपीजी आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थिति को संभालने और घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं।
वर्तमान संकट
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 60% हिस्सा आयात करता है, और इस आयात का 90% पश्चिम एशिया से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग के बाधित होने का सीधा अर्थ यह है कि भारत की कुल एलपीजी खपत का लगभग 55% हिस्सा वर्तमान में अनुपलब्ध है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उठाए गए कदम और नए नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 33 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं की रसोई गैस की जरूरत उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया गया है ताकि कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं के मुकाबले घरों को प्राथमिकता दी जा सके। ‘पैनिक बुकिंग’ (घबराहट में बुकिंग) को रोकने के लिए ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच का न्यूनतम अंतर बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं, शहरी घरों के लिए यह 25 दिन ही रहेगा (संघर्ष शुरू होने से पहले यह 21 दिन था)।
घरेलू उत्पादन में वृद्धि
रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू एलपीजी उत्पादन में संघर्ष-पूर्व के स्तर से 28% की वृद्धि हुई है और इसे सीधे घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भेजा जा रहा है।
होटल-रेस्टोरेंट के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, इन चीजों को बढ़ावा दे रही सरकार
कॉमर्शियल यूजर्स पर एलपीजी का दबाव कम करने के लिए सरकार ने अन्य ईंधन विकल्पों को सक्रिय किया है। वैकल्पिक ईंधनों को मंजूरी: पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सलाह दी है कि वे एक महीने के संकट काल के लिए हॉस्पिटैलिटी और रेस्टोरेंट क्षेत्र में बायोमास, आरडीएफ (RDF) पेलेट्स, केरोसिन और कोयले के इस्तेमाल की अनुमति दें।
सीमित एलपीजी आवंटन: कॉमर्शियल उपयोग के लिए औसत मासिक एलपीजी आवश्यकता का 20% हिस्सा ही आवंटित किया जाएगा। यह काम राज्य सरकारों के समन्वय से होगा ताकि कालाबाजारी रोकी जा सके। प्राथमिकता वाले क्षेत्र: अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को निर्बाध आपूर्ति के लिए प्राथमिकता सूची में रखा गया है।
अतिरिक्त आवंटन: पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्य सरकारों को अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसिन जारी किया है। साथ ही, छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के लिए राज्यों को अधिक कोयला आवंटित करने का निर्देश भी दिया गया है।
कालाबाजारी रोकने के उपाय
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि वाणिज्यिक एलपीजी पूरी तरह से अनियमित बाजार में बेची जाती है, जहां कोई भी कितनी भी मात्रा में इसे खरीद सकता है। आपूर्ति सीमित होने पर इसकी जमाखोरी और कालाबाजारी होने का खतरा था, इसलिए इसे विनियमित किया गया है। स्थिति की निगरानी के लिए IOCL, HPCL और BPCL के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। सप्लाई की निगरानी और डायवर्जन रोकने के लिए जिला स्तरीय समितियां बनाई जा रही हैं। राज्य सरकारों को जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
विपक्ष की आलोचना और सरकार का जवाब
राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष) ने कहा कि इस युद्ध के दूरगामी परिणाम होंगे और अभी यह केवल शुरुआत है। रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं और वेंडर्स प्रभावित हैं। उन्होंने सरकार की ऊर्जा सुरक्षा नीति और विदेशी दबाव पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा यह अमेरिका तय कर रहा है।
पेट्रोलियम मंत्री का जवाब
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह समय अफवाह फैलाने का नहीं है। भारत इतिहास के सबसे गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, फिर भी स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों के कारण गैर-होर्मुज स्रोतों से कच्चे तेल का आयात 55% से बढ़कर 70% हो गया है। भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल मंगाता है। देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कोई कमी नहीं है। प्राकृतिक गैस के आवंटन में घरों की पाइप्ड गैस और वाहनों के लिए CNG को 100% आपूर्ति दी जा रही है। उद्योगों को उनके पिछले छह महीने के औसत का 80% और उर्वरक संयंत्रों को 70% गैस मिलेगी। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे घबराकर गैस की अतिरिक्त बुकिंग न करें क्योंकि आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
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