तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच Iran ने बड़ा दावा किया है। ईरान की सेना की प्रमुख इकाई (Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने कहा कि उसने अमेरिकी विमानवाहक युद्धपोत USS Abraham Lincoln (CVN-72) पर चार बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।
हालांकि United States ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह जंगी जहाज पूरी तरह सुरक्षित है और सामान्य रूप से अपने मिशन पर काम कर रहा है। इस बयानबाजी के बाद दुनिया का ध्यान अमेरिका के इस शक्तिशाली विमानवाहक पोत की ओर फिर से गया है, जो तीन दशकों से अमेरिकी नौसैनिक ताकत का अहम प्रतीक माना जाता है।
USS Abraham Lincoln (CVN-72) अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत है। इसका हुल नंबर CVN-72 है, जो जहाज की श्रेणी और पहचान को दर्शाता है। यह जहाज नवंबर 1989 में अमेरिकी नौसेना में शामिल किया गया था।
यह दुनिया के सबसे बड़े और शक्तिशाली विमानवाहक जहाजों में से एक है और Nimitz-class aircraft carrier श्रेणी का हिस्सा है। इस श्रेणी के जहाज अमेरिकी नौसेना की रणनीतिक ताकत की रीढ़ माने जाते हैं।
यह जहाज परमाणु रिएक्टर से संचालित होता है, इसलिए इसे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती।
एक बार में 70 से अधिक लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं।
इसकी लंबाई लगभग 333 मीटर और वजन करीब 100,000 टन तक होता है।
इस पर करीब 5,000 से ज्यादा सैनिक और क्रू सदस्य तैनात रह सकते हैं।
अत्याधुनिक रडार, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक से लैस होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक विमानवाहक पोत वास्तव में समुद्र में चलता-फिरता एयरबेस होता है। इससे लड़ाकू विमान लंबी दूरी तक मिशन चला सकते हैं, दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं और समुद्री क्षेत्रों में वर्चस्व बनाए रखते हैं।
USS Abraham Lincoln (CVN-72) को पिछले तीन दशकों में कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में तैनात किया जा चुका है। यह जहाज Iraq War और War in Afghanistan के दौरान भी अमेरिकी अभियानों का हिस्सा रहा है।
इसी वजह से इसे अमेरिकी नौसैनिक शक्ति के सबसे प्रभावशाली प्रतीकों में गिना जाता है।
मौजूदा समय में Israel, Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस विमानवाहक पोत की भूमिका पर खास नजर रखी जा रही है। ईरान के हमले के दावे और अमेरिका के खंडन के बीच यह जंगी जहाज फिर से वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है।
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