
नई दिल्ली । कलयुग (The Age of Kali) को अक्सर ऐसा समय माना जाता है जब भक्ति और साधना (Devotion and Spiritual Practice) का प्रभाव कम हो गया है और लोगों को भगवान के साक्षात दर्शन(face to face) मिलना दुर्लभ हो गया है लेकिन धर्म शास्त्रों (Religious Scriptures )और जनमान्यताओं के अनुसार आज भी कुछ ऐसे देवी देवता (gods and goddesses)हैं जिन्हें जागृत माना जाता है यानी वे अपने भक्तों के बीच उपस्थित हैं और सच्चे मन से की गई प्रार्थना को तुरंत स्वीकार करते हैं ऐसे देवताओं की भक्ति करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट भी दूर हो सकते हैं
सबसे पहले नाम आता है संकटमोचन हनुमान जी का जिन्हें कलयुग का सबसे प्रभावशाली देवता माना गया है मान्यता है कि उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है और वे आज भी पृथ्वी पर विराजमान हैं हनुमान जी भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं और अपने भक्तों के हर संकट को दूर करने वाले हैं जब भी जीवन में भय बाधा या संकट आए तो हनुमान चालीसा का पाठ और राम नाम का जप अत्यंत प्रभावी माना जाता है कहा जाता है कि सच्चे मन से स्मरण करने पर हनुमान जी तुरंत सहायता करते हैं
दूसरे जागृत देवता के रूप में काल भैरव का नाम लिया जाता है जो भगवान शिव का रौद्र स्वरूप हैं उनका नाम सुनते ही मन में भय उत्पन्न होता है लेकिन वास्तव में वे अत्यंत दयालु और अपने भक्तों की रक्षा करने वाले देवता हैं काल भैरव की उपासना विशेष रूप से रात्रि में की जाती है और यह पूजा बहुत शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है मान्यता है कि उनकी कृपा से शनि और राहु जैसे ग्रहों के दोष भी शांत हो जाते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं
तीसरी जागृत देवी के रूप में मां काली या महाकाली का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है मां काली का स्वरूप भले ही उग्र और रौद्र दिखाई देता हो लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत ममतामयी और करुणामयी हैं वे अन्याय और अधर्म का नाश करती हैं और अपने भक्तों को हर प्रकार के भय से मुक्त करती हैं जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी आराधना करता है उसके जीवन के कष्ट शीघ्र समाप्त होते हैं और उसे सुरक्षा तथा शक्ति प्राप्त होती है
चौथे जागृत देवता के रूप में सूर्य देव का उल्लेख किया जाता है जो प्रत्यक्ष देवता माने जाते हैं क्योंकि वे प्रतिदिन दर्शन देते हैं सूर्य को जल अर्पित करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है इससे व्यक्ति को ऊर्जा आत्मविश्वास सफलता और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है सूर्य उपासना से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है और उसका व्यक्तित्व निखरता है इसलिए कलयुग में सूर्य देव की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है
पांचवें जागृत देवता के रूप में भगवान शिव स्वयं भी माने जाते हैं जिन्हें भोलेनाथ कहा जाता है वे अत्यंत सरल स्वभाव के हैं और अपने भक्तों की थोड़ी सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाते हैं शिव की उपासना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है जलाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष फलदायी माना गया है
इस प्रकार कलयुग में भी भक्ति का महत्व कम नहीं हुआ है बल्कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई प्रार्थना आज भी उतनी ही प्रभावी है इन जागृत देवी देवताओं की आराधना करके व्यक्ति अपने जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सकता है और सुख शांति तथा समृद्धि प्राप्त कर सकता है
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