
नई दिल्ली। साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण(final solar eclipse) 12 अगस्त की रात को लगने जा रहा है। यह खगोलीय (astronomical)घटना भारतीय समय(Indian Standard Time) के अनुसार रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 13 अगस्त की मध्य रात्रि के बाद समाप्त होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ग्रहण का मध्य समय रात करीब 11 बजकर 16 मिनट रहेगा और इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट बताई जा रही है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में रहने वाले लोगों को इसे लेकर सूतक काल और धार्मिक नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। जब सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य तथा पृथ्वी के बीच आ जाता है तब सूर्य की रोशनी का कुछ हिस्सा पृथ्वी तक पहुंचने से रुक जाता है। इसी दौरान पृथ्वी के कुछ हिस्सों से सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। इस बार ग्रहण दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे जाम्बिया तंजानिया मॉरीशस अंटार्कटिका तथा दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। अर्जेंटीना और चिली के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी दृश्यता बताई गई है।
भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने भोजन को लेकर विशेष प्रतिबंध लगाने या सामान्य दिनचर्या रोकने की जरूरत नहीं होगी। गर्भवती महिलाओं के लिए भी केवल ग्रहण के नाम पर किसी विशेष तरह की पाबंदी वैज्ञानिक रूप से जरूरी नहीं मानी जाती। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए बच्चे बुजुर्ग और मरीज अपनी जरूरत के अनुसार भोजन और पानी लेते रह सकते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस सूर्य ग्रहण को कर्क राशि और शतभिषा नक्षत्र से जोड़ा जा रहा है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल नेतृत्व प्रतिष्ठा प्रशासन और ऊर्जा का कारक माना जाता है। इसलिए ग्रहण को लेकर राजनीतिक प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े क्षेत्रों पर प्रभाव की चर्चाएं भी की जा रही हैं। हालांकि प्राकृतिक आपदाओं राजनीतिक बदलाव या दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं की निश्चित भविष्यवाणी केवल ग्रहण के आधार पर वैज्ञानिक रूप से नहीं की जा सकती।
ग्रहण के दौरान धार्मिक आस्था रखने वाले लोग ध्यान मंत्र जाप और अपने इष्ट देव का स्मरण कर सकते हैं। ऊं घृणि सूर्याय नमः ऊं सूर्याय नमः या गायत्री मंत्र का जाप करने की परंपरा बताई जाती है। जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या आवश्यक सामग्री का दान भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।
जहां सूर्य ग्रहण दिखाई देगा वहां आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। सूर्य को बिना प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास या उचित फिल्टर के सीधे देखने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां रहने वाले लोगों को इसे देखने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की जरूरत नहीं होगी।
ज्योतिषीय आकलन में कन्या तुला और कुंभ राशि के लिए ग्रहण को अपेक्षाकृत शुभ बताया जा रहा है जबकि कुछ अन्य राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि किसी व्यक्ति पर ग्रहण का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर भय या चिंता करने के बजाय इसे एक खगोलीय घटना के रूप में समझना और धार्मिक मान्यताओं का पालन अपनी आस्था के अनुसार करना बेहतर है।
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