
नई दिल्ली. डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान वॉर (Iran War) को लेकर संबोधित करते हुए कहा कि हम ईरान को कभी भी परमाणु शक्ति (nuclear power) नहीं बनने देंगे. उससे कोई भी डील नहीं करने जा रहे हैं. 2 से 3 हफ्तों में बड़ी कार्रवाई करने जा रहे हैं. अमेरिकी सेना अपने लक्ष्यों को हासिल करने के बेहद करीब है.
उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से सुरक्षित करेंगे. साथ ही यह भी कहा कि जो लोग उस रास्ते से तेल आयात करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा में आगे आना चाहिए. अमेरिका उनकी मदद करेगा. ट्रंप के इस तरह के बयान के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला.
तेल की कीमतों में जोरदार तेजी
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil ) कीमत 106 डॉलर के ऊपर चला गया, जबकि एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुका था. हालांकि, आज बड़ी तेजी देखी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 5% उछलकर $106.22 प्रति बैरल पर पहुंच गया. बेंचमार्क अमेरिकी क्रूड 4.2% बढ़कर $104.36 प्रति बैरल पर आ गया.
भारत के लिए भी दिक्कत बढ़ी
ट्रंप के इस संबोधन से तेल की कीमतों में जोरदार तेजी देखी जा रही है. कल की तुलना में आज कच्चे तेल की कीमत करीब 8 डॉलर प्रति बैरल बढ़ चुकी है. जहां बुधवार तक सबकुछ सही लग रहा था, वहीं आज फिर से स्थिति बिगड़ती हुई दिख रही है.
कच्चे तेल का कॉन्ट्रैक्ट भारत समेत पूरी दुनिया के लिए महंगा हो चुका है. जहां बुधवार तक कच्चे तेल सस्ते रेट पर मिल रहे थे, वहीं अब कच्चे तेल 105 डॉलर या उससे भी ज्यादा कीमत पर मिल सकते हैं, क्योंकि कच्चे तेल कीमतें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. हर घंटे इसके दाम बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं.
एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट
ट्रंप के संबोधन और तेल की कीमतों में जोरदार तेजी के बाद गुरुवार को एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट आई है. शुरुआती कारोबार में टोक्यो का निक्केई 225 1.4% गिरकर 53,004.81 पर आ गया. दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.4% गिरकर 5,292.36 पर आ गया. हांगकांग का हैंग सेंग 0.8% गिरकर 25,082.59 पर आ गया. अमेरिकी वायदा बाज़ार 0.7% से ज़्यादा नीचे थे.
भारतीय बाजार में भी गिरावट के संकेत
ट्रंप के संबोधन के बाद भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट के संकेत दिखाई दे रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी 450 अंकों से ज्यादा की गिरावट का संकेत दे रहा है. यह गिरावट तेल की कीमतों के लगातार बढ़ने से और भी गहरा सकता है.
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