
नई दिल्ली । इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Verma of Allahabad High Court) ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया (Submitted his resignation to the President) ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशंवत वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है कि मैं उन कारणों की तह नहीं जाना चाहता जिन्होंने मुझे यह पत्र लिखने के लिए मजबूर किया है। जस्टिस वर्मा ने पत्र में लिखा, ”अत्यंत दुख के साथ मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज के पद से अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।’
इससे पहले, उनके आवास पर कथित तौर पर कैश मिलने को लेकर हुए विवाद के बाद, उनका दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद तबादला कर दिया गया था। उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को शपथ ली थी और फ़िलहाल उनके ख़िलाफ़ आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच चल रही है, जिसके चलते उन्हें संसद द्वारा पद से हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की भी संभावना थी । जस्टिस वर्मा ने 8 अगस्त 1992 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत के साथ अपना करियर शुरू किया था।
आपको बता दें कि 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के घर में आग लगी थी और इसी दौरान दमकलकर्मियों को बेहिसाब नकदी मिली। हालांकि, घटना के वक्त जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी उस समय दिल्ली में नहीं थे और मध्य प्रदेश गए हुए थे। आग लगने के समय घर पर केवल उनकी बेटी और मां ही मौजूद थे। जले हुए कैश के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए।
न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे। न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोपों से इनकार किया लेकिन उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया और आगे की कार्रवाई पर विचार किए जाने तक उनसे न्यायिक कार्य छीन लिया गया। भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आरोपों की आंतरिक जांच शुरू की और 22 मार्च को जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।
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