
वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति (us President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोमवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम (Security Team) के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में ईरान (Iran) के उस ताजा प्रस्ताव पर चर्चा हुई जिसमें होर्मुज (Strait of Hormuz) जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही गई है। हालांकि ईरान ने इसके बदले में उस पर लगी आर्थिक पाबंदियां हटानी की शर्त रखी है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। हालांकि ट्रंप इसे मानने के मूड में नहीं दिख रहे है।
व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
इस बीच व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने मीडिया वार्ता में बताया कि ट्रंप इस प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बैठक के नतीजे पर पहले से कुछ भी कहने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति खुद जल्द ही इस विषय पर जानकारी देंगे।
मार्को रुबियो ने क्या कहा
इससे पहले, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ईरानी वार्ताकार अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर गंभीर दिख रहे हैं। वे खुद को मौजूदा मुश्किलों से बाहर निकालना चाहते हैं। हालांकि, वे इसके जरिए सिर्फ और समय हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। रुबियो ने ईरान की आंतरिक स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ईरान का शासन कट्टरपंथी शिया मौलवियों के हाथ में है, जो शांति वार्ता में एक बड़ी बाधा है।
ईरान के भीतर दो गुट हैं। एक गुट राजनीतिक वर्ग का है जो देश और अर्थव्यवस्था चलाना चाहता है। दूसरा गुट पूरी तरह धार्मिक विचारधारा से प्रेरित है, जिसमें रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और सर्वोच्च नेता शामिल हैं। रुबियो के अनुसार, अमेरिकी वार्ताकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ईरानी प्रतिनिधियों को पहले अपने ही देश के दूसरे गुटों से बात करनी पड़ती है। वे आपस में ही बंटे हुए हैं कि क्या प्रस्ताव देना है और किससे मिलना है।
इस बीच, अमेरिकी प्रशासन ईरान की बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी के असर को सकारात्मक मान रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने समझौते के लिए जो नई शर्तें रखी हैं, वे अभी भी अमेरिका की तय सीमाओं (रेड लाइन्स) से काफी दूर हैं।
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