
कोलकाता । कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवाएं (Services of Kolkata Police Deputy Commissioner Shantanu Sinha Biswas) समाप्त कर दी गईं (Have been Terminated) ।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीते दिनों गिरफ्तार किया था। शांतनु सिन्हा बिस्वास उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें पिछली ममता बनर्जी की सरकार ने दो साल का सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) दिया था। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई है। इसी क्रम में नई भाजपा सरकार ने सिन्हा बिस्वास का सेवा विस्तार समाप्त कर दिया है। राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ के एक अंदरूनी सूत्र के अनुसार, सेवा विस्तार पाने वाले अन्य अधिकारियों के विपरीत, सिन्हा बिस्वास को इस्तीफा देने का अवसर नहीं दिया गया। इसके बजाय, राज्य सरकार ने सीधे तौर पर उनका सेवा विस्तार समाप्त कर दिया। बीते दिनों ईडी ने कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन से जुड़े सिंडिकेट के कुछ मामलों के संबंध में की, जिसमें एक कुख्यात और फिलहाल फरार ‘हिस्ट्री-शीटर’ बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ भी शामिल है।
गुरुवार रात गिरफ्तारी से पहले, ईडी के अधिकारियों ने शांतनु से लगभग 10 घंटे तक पूछताछ की थी। इससे पहले, जब ईडी से पूछताछ के लिए कई नोटिस मिलने के बाद शांतनु सिन्हा फरार हो गए थे, तब एजेंसी ने उनके खिलाफ ‘लुकआउट नोटिस’ जारी किया था। इसी बीच, घटनाक्रम से परिचित सूत्रों ने बताया कि कोलकाता पुलिस के 12 अन्य पुलिसकर्मी, जो सिन्हा बिस्वास के सेवाकाल के दौरान उनके करीबी विश्वासपात्र थे, अब ईडी की जांच के दायरे में हैं। इन पर उसी मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन से जुड़े सिंडिकेट मामले में शामिल होने का आरोप है, जिसमें शहर पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर को गिरफ्तार किया गया था।
आरोप है कि सोना पप्पू, गिरफ्तार रियल एस्टेट कारोबारी जॉय कामदार और सिन्हा बिस्वास के नेतृत्व वाले कुछ पुलिसकर्मियों का यह गठजोड़ कोलकाता और आसपास के इलाकों में विवादित जमीनों और संपत्तियों को बेहद कम कीमत पर कब्जाने का काम करता था। बाद में इन्हें बड़े मुनाफे वाले रियल एस्टेट कारोबार में इस्तेमाल किया जाता था। यह गिरोह असली जमीन मालिकों पर दबाव बनाने के लिए अलग-अलग पुलिस थानों में उनके खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज करवाता था, ताकि वे अपनी जमीन या संपत्ति बहुत कम कीमत पर इस सिंडिकेट को बेचने पर मजबूर हो जाएं। जानकारी के मुताबिक, ईडी की जांच के घेरे में आए 12 अन्य पुलिसकर्मी ज्यादातर इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी हैं।
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