
नई दिल्ली(New Delhi)।वट सावित्री व्रत(Vat Savitri Vrat) आज देशभर की सुहागिन महिलाएं(Today, married women) पति की लंबी उम्र(praying for the longevity of their husbands) और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ रख रही हैं। यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या(Jyeshtha Amavasya) के दिन किया जाता है और इसे कई महिलाएं निर्जला रखती हैं, जबकि कुछ महिलाएं फलाहार(consuming fruits) के साथ व्रत पूर्ण करती हैं।
वट सावित्री व्रत में क्या खाना सही है?
व्रत के दौरान हल्का और सात्विक भोजन सबसे उचित माना जाता है। फलाहार में ये चीजें शामिल की जा सकती हैं:
मौसमी फल जैसे आम, तरबूज, लीची, खरबूजा
दूध और दही
मखाना और मूंगफली
सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स)
सिंघाड़े और कुट्टू के आटे से बने पकवान
कुछ परंपराओं में गुड़ और आटे से बनी मीठी पूरियां तथा चने का प्रसाद भी ग्रहण किया जाता है।
व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
वट सावित्री व्रत में तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए:
प्याज और लहसुन
मांस और मदिरा
चावल और सामान्य नमक
तेल में बना भारी भोजन
सरसों के तेल का उपयोग
व्रत में पानी पीने के नियम
निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं अगले दिन पूजा के बाद ही जल ग्रहण करें
अगर कठिन लगे तो वट वृक्ष की पूजा और कथा सुनने के बाद शाम को पानी पी सकते हैं
व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत पति की दीर्घायु, वैवाहिक सुख और परिवार की समृद्धि के लिए किया जाता है। यह व्रत श्रद्धा, संयम और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
वट सावित्री व्रत में सही फलाहार और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। सात्विक आहार और शुद्धता के साथ किया गया व्रत ही पूर्ण फल देता है और धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।
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