नई दिल्ली। जापान (Japan) में लगभग तीन दशक से रह रहे भारतीय मूल के रेस्तरां संचालक मनीष कुमार (Manish Kumar) की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया और प्रवासी समुदाय (Diaspora Community) में चर्चा का विषय बनी हुई है। जापान के सैतामा प्रांत में 18 वर्षों से भारतीय करी रेस्तरां चला रहे मनीष कुमार को तब बड़ा झटका लगा, जब जापानी आव्रजन अधिकारियों ने उनके बिजनेस मैनेजर वीजा के नवीनीकरण से इनकार कर दिया और उन्हें भारत लौटने का निर्देश दे दिया।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भावुक हुए मनीष कुमार ने कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से जापान में अपना घर और कारोबार खड़ा किया। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे जापान में ही पैदा हुए और पले-बढ़े हैं। वे केवल जापानी भाषा बोलते हैं और वहीं के स्कूलों में पढ़ रहे हैं। ऐसे में अचानक पूरे परिवार को भारत लौटने के आदेश ने उन्हें गहरे संकट में डाल दिया है।
मनीष कुमार ने कहा कि उन्होंने स्थानीय समाज के सहयोग से अपना व्यवसाय स्थापित किया और हमेशा नियमों का पालन किया। उनका कहना है कि अचानक बदले गए नियमों की वजह से अब उन्हें अपना रेस्तरां बंद करने की नौबत आ गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि दशकों से जापान में रह रहे परिवारों के साथ इस तरह का व्यवहार कितना मानवीय है।
उनकी भावुक अपील का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर बड़ी संख्या में लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोगों ने इसे प्रवासी परिवारों के प्रति कठोर रवैया बताया है।
दरअसल, जापान सरकार ने पिछले वर्ष बिजनेस मैनेजर वीजा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया था। नए नियमों के तहत न्यूनतम निवेश राशि 50 लाख येन से बढ़ाकर 3 करोड़ येन कर दी गई है। इसके साथ ही आवेदकों और कर्मचारियों के लिए जापानी भाषा में दक्षता का प्रमाण भी अनिवार्य बनाया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम वीजा प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने और फर्जी कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है। हालांकि इन नियमों का असर लंबे समय से वहां रह रहे विदेशी कारोबारियों पर भी पड़ रहा है।
जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए नियम लागू होने के बाद बिजनेस मैनेजर वीजा के आवेदनों में भारी कमी दर्ज की गई है। वहीं, इन बदलावों के खिलाफ ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया है, जिसमें हजारों लोगों ने समर्थन दिया है। याचिका में सरकार से पुराने नियमों की समीक्षा करने की मांग की गई है।
मनीष कुमार का मामला अब जापान की आव्रजन नीति पर व्यापक बहस का कारण बन गया है। कई विदेशी नागरिकों का कहना है कि वर्षों तक वहां रहने, टैक्स चुकाने और समाज का हिस्सा बनने के बावजूद उनकी कानूनी स्थिति अचानक अस्थिर हो सकती है। इससे प्रवासी समुदाय में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
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