
नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास (History) में कई ऐसे गीत (Songs) बने हैं जिन्होंने समय के साथ अपनी अलग पहचान बनाई और पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जगह बनाई। लेकिन कुछ गानों का सफर आसान नहीं रहा। एक ऐसा ही मशहूर गीत था जिसे सेंसर बोर्ड (Censor Board) ने अश्लील बताकर कई बार रिजेक्ट (Rejected) कर दिया was। इतना ही नहीं, यह गाना दो फिल्मों से बाहर कर दिया गया, लेकिन बाद में जब यह बड़े पर्दे (Big Screen) पर सुनाई दिया तो हमेशा के लिए अमर हो गया। आज भी बारिश के मौसम में यह गीत लोगों की जुबान पर खुद-ब-खुद आ जाता है।
यह कहानी 1950 के दशक की है, जब मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही थी। उस दौर में वे एक फिल्म के लिए संगीत तैयार कर रहे थे। फिल्म लगभग पूरी हो चुकी थी और सेंसर सर्टिफिकेट के लिए भेजी गई। इसी दौरान सेंसर बोर्ड ने फिल्म के एक गाने के कुछ बोलों पर आपत्ति जता दी। बोर्ड का मानना था कि गाने के शब्द उस समय के सामाजिक माहौल के हिसाब से ठीक नहीं हैं।
फिल्म की रिलीज करीब थी और गाना पहले ही शूट हो चुका था। ऐसे में निर्माताओं ने विवाद से बचने के लिए उस गीत को फिल्म से हटाने का फैसला कर लिया। हालांकि संगीतकार जोड़ी को अपने गाने पर पूरा भरोसा था। उन्हें लगता था कि इस धुन और इसके बोलों में कुछ खास बात है जो दर्शकों को जरूर पसंद आएगी। यही वजह थी कि उन्होंने उस गाने को पूरी तरह छोड़ने के बजाय किसी दूसरी फिल्म में इस्तेमाल करने का फैसला किया।
कुछ समय बाद एक और फिल्म में इस गीत को शामिल करने की कोशिश की गई, लेकिन वहां भी बात नहीं बन सकी। फिल्म की कहानी और माहौल के हिसाब से यह गीत फिट नहीं बैठ रहा था। फिर एक दूसरी फिल्म में इसे सुनाया गया, लेकिन निर्देशक ने इसे स्वीकार नहीं किया। सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के कारण निर्माता और निर्देशक किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते थे। लगातार दो फिल्मों से बाहर होने के बाद भी संगीतकारों का भरोसा इस गाने पर कायम रहा।
इसके बाद एक नई फिल्म की तैयारी शुरू हुई जिसमें राज कपूर और नूतन मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की कहानी भावनाओं और बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। फिल्म के लिए एक बारिश वाला गीत चाहिए था जो दर्शकों को तुरंत आकर्षित कर सके। इसी दौरान संगीतकारों ने अपना वही पुराना रिजेक्टेड गाना निर्देशक को सुनाया। इस बार गाना सुनते ही सभी को उसकी धुन बेहद पसंद आई। हालांकि सेंसर बोर्ड की पुरानी आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए गीत के कुछ बोलों में बदलाव किया गया। गीतकार को दोबारा बुलाकर अंतरे नए तरीके से लिखवाए गए और गाना फिर रिकॉर्ड किया गया।
लेकिन मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। जब फिल्म दोबारा सेंसर बोर्ड के पास पहुंची तो फिर कुछ बोलों पर आपत्ति जताई गई। एक बार फिर गीत में बदलाव किए गए। आखिरकार कई बदलावों और मेहनत के बाद यह गीत फिल्म में शामिल हो पाया।
वह गीत था ‘डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा भीगा’। रिलीज होते ही यह गाना लोगों की जुबान पर चढ़ गया। राज कपूर और नूतन पर फिल्माया गया यह गीत बारिश के सबसे लोकप्रिय गानों में शामिल हो गया। आज भी दशकों बाद यह गीत सुनते ही लोगों के चेहरे खिल उठते हैं और पुराने दौर की यादें ताजा हो जाती हैं। यही वजह है कि कभी रिजेक्ट किया गया यह गीत आज हिंदी सिनेमा के सबसे अमर गीतों में गिना जाता है।
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