
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए दोबारा मतदान की गिनती जारी है। 21 में से 20 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद भाजपा प्रत्याशी ने 1.04 लाख से अधिक वोटों की निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। करीब एक लाख वोट से आगे चल रहे पांडा के बाद दूसरे नंबर पर वाम दल प्रत्याशी शंभू नाथ कुर्मी हैं। इसका मतलब ये है कि सीपीआईएम के साथ-साथ कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस भी दौड़ से लगभग बाहर हो चुके हैं। विजेता का औपचारिक एलान होना बाकी है।
निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी को 1,49,666 वोट मिले हैं। जीत का अंतर 1.09 लाख वोट से अधिक रहा है। दूसरे नंबर पर रहे सीपीएम प्रत्याशी शंभू नाथ कुर्मी को 40,645 वोट मिले। तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला को 10,084 वोट मिले। चौथे नंबर पर खिसकी पार्टी- तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान को केवल 7783 वोट से संतोष करना पड़ा।
शाम करीब चार बजे तक 19वें राउंड की गिनती तक भाजपा प्रत्याशी 99,433 वोटों से आगे चल रहे हैं। भाजपा नेता देबांग्शु पांडा को 1.37 लाख से अधिक वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर सीपीआईएम प्रत्याशी हैं। सीपीआईएम प्रत्याशी शंभु नाथ कुर्मी को 38,285 वोट मिले हैं।
इससे पहले दोपहर करीब सवा दो बजे 15वें दौर की मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा के देबांशु पांडा सबसे आगे चल रहे हैं। उन्होंने सीपीएम के शंभू नाथ कुर्मी पर 69,000 से अधिक वोटों की बड़ी बढ़त बना ली है। भाजपा को अब तक 1,03,089 वोट मिले हैं, जबकि सीपीएम को सिर्फ 33,416 वोट मिले हैं। कांग्रेस और टीएमसी के उम्मीदवार इस दौड़ में बहुत पीछे छूट गए हैं।
बता दें कि बीते 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण के दौरान इस सीट पर मतदान हुआ था। उस समय ईवीएम में हेरफेर और गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। भारी हंगामे के बाद निर्वाचन आयोग ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 बूथों पर मतदान रद्द कर दिया था। इसके बाद बीते 21 मई को पूरी सीट पर दोबारा मतदान कराने का आदेश जारी किया गया था।
21 मई को हुए पुनर्मतदान में मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाया। क्षेत्र के कुल 2.36 लाख मतदाताओं में से 87 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पुनर्मतदान को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था दोगुनी कर दी थी। पूरे निर्वाचन क्षेत्र में केंद्रीय बलों की करीब 35 कंपनियां तैनात की गई थीं, जिससे मतदान प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हुई।
इस सीट पर चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और नाटकीय रहा। हालांकि आधिकारिक तौर पर मैदान में छह उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन ऐन वक्त पर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने पुनर्मतदान से महज दो दिन पहले अचानक घोषणा कर दी कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि टीएमसी ने इसे जहांगीर खान का व्यक्तिगत फैसला बताया, लेकिन इस कदम ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी।
29 अप्रैल को मतदान के दौरान फलता सीट पर भारी तनाव व्याप्त हो गया था। कई बूथों से ऐसी शिकायतें आई थीं कि ईवीएम मशीनों पर इत्र जैसी कोई चीज और चिपचिपे टेप लगाए गए थे। इसके बाद जब चुनाव अधिकारियों ने मामले की गहन जांच की, तो पता चला कि कई पोलिंग बूथों पर वेब कैमरों के फुटेज के साथ भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई थी। इस मामले में बूथ स्तर के अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों, मतदान कर्मियों और चुनाव पर्यवेक्षकों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर दोबारा वोटिंग का फैसला किया था।
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