
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal) में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) में असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी के भीतर शुरू हुआ विरोध अब नगर निगमों और शहरी निकायों तक पहुंच गया है। बुधवार को कोलकाता नगर निगम (Kolkata Municipal Corporation) के दो वरिष्ठ पार्षदों (Councilors) ने अपने अहम पदों से इस्तीफा (Resign) देकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी।
टीएमसी नेता सुशांत घोष ने बरो-12 चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया, जबकि अरूप चक्रवर्ती ने नगर निगम की अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन पद से हटने का फैसला किया। हालांकि दोनों नेताओं ने पार्षद पद नहीं छोड़ा है।
पार्टी नेतृत्व पर साधा निशाना
इस्तीफे के साथ दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी भी जाहिर की। अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि चुनावी हार को स्वीकार करना जरूरी है, क्योंकि हार को नजरअंदाज करने से पिछली जीतों का महत्व भी कम हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद कई वरिष्ठ नेता और मंत्री आम कार्यकर्ताओं व पार्षदों से दूरी बना चुके हैं। उनका कहना था कि वर्षों तक कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री तक पहुंचने में भी बाधाएं खड़ी कीं और अब हार के बाद वही लोग जनता के बीच दिखाई नहीं दे रहे।
भाजपा सरकार की तारीफ से बढ़ीं अटकलें
दोनों नेताओं ने चुनाव के बाद अपने समर्थकों की मदद करने के लिए भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सराहना भी की। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में उनके दल बदलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुशांत घोष ने अपने घर के बाहर हुए हमले का जिक्र करते हुए पुलिस जांच पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
भवानीपुर से शुरू हुआ असंतोष
टीएमसी के भीतर असंतोष का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब पार्षद देबोलीना बिस्वास ने भवानीपुर सीट पर खराब प्रदर्शन के बाद केएमसी के बोरो IX अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। भवानीपुर को लंबे समय तक पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
लगातार बढ़ रहे इस्तीफे
सूत्रों के मुताबिक सत्ता परिवर्तन के बाद अब तक 60 से ज्यादा टीएमसी पार्षद विभिन्न नगर निकायों में अपने पद छोड़ चुके हैं या संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बना चुके हैं। कई पार्षदों ने दफ्तर आना भी बंद कर दिया है, जिससे नगर सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम और नगरपालिकाएं लंबे समय तक टीएमसी की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रही हैं, लेकिन अब पार्टी का यही ढांचा दबाव और असंतोष से जूझता नजर आ रहा है।
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