कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मालदा जिले स्थित ऐतिहासिक अदीना मस्जिद (The historic Adina Mosque) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। कुछ हिंदू संगठनों ने दावा किया है कि यह मस्जिद मूल रूप से प्राचीन आदिनाथ शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। इसी दावे के आधार पर सावन के महीने में मस्जिद परिसर के पास शिवलिंग स्थापित कर रुद्राभिषेक करने की घोषणा की गई है। इस ऐलान के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
मंदिर होने के पक्ष में क्या हैं दावे?
आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर समिति और अन्य समर्थकों का कहना है कि अदीना मस्जिद परिसर में कई ऐसे स्थापत्य चिह्न मौजूद हैं, जिन्हें वे हिंदू मंदिर की पहचान बताते हैं। उनके अनुसार परिसर में गणेश प्रतिमा जैसी आकृतियां, कलश, कमल, नाग, घंटी और अन्य धार्मिक प्रतीकों जैसी नक्काशी दिखाई देती है। इन दावों के आधार पर संगठन का कहना है कि मस्जिद का निर्माण किसी प्राचीन मंदिर के अवशेषों का उपयोग कर किया गया था।
शिवलिंग स्थापना का ऐलान
आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर समिति ने घोषणा की है कि सावन के दौरान हुगली के तारकेश्वर से लाए गए शिवलिंग की स्थापना मस्जिद परिसर के निकट स्थित मंदिर में की जाएगी। समिति के अनुसार प्रस्तावित शिवलिंग लगभग 3.6 फीट ऊंचा और करीब डेढ़ टन वजनी होगा। संगठन का कहना है कि यह धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया जाएगा।
पहले भी उठ चुका है विवाद
अदीना मस्जिद को लेकर विवाद इससे पहले भी चर्चा में रह चुका है। पिछले वर्ष तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान द्वारा मस्जिद परिसर की तस्वीरें साझा किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी ऐतिहासिक पहचान को लेकर बहस छिड़ गई थी। बाद में दिसंबर 2025 में यह मुद्दा संसद में भी उठा, जहां भाजपा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने इस स्थल को हिंदू समुदाय को सौंपने की मांग की थी।
ASI का क्या है रुख?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के रिकॉर्ड के अनुसार, अदीना मस्जिद का निर्माण 1373 ईस्वी में बंगाल सल्तनत के सुल्तान सिकंदर शाह ने कराया था। ASI इसे प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक मानता है। फिलहाल ASI ने मंदिर होने के दावों की पुष्टि नहीं की है।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
अदीना मस्जिद की ऐतिहासिक पहचान को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि स्मारक की पहचान गलत तरीके से मस्जिद के रूप में दर्ज की गई है और परिसर में मौजूद कथित हिंदू धार्मिक प्रतीकों के आधार पर इसकी दोबारा वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच कराई जानी चाहिए। इस मामले पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
प्रशासन ने जारी की चेतावनी
शिवलिंग स्थापना की घोषणा के बाद मालदा प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संरक्षित स्मारक परिसर के भीतर बिना अनुमति किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन, निर्माण या संरचना में बदलाव कानून का उल्लंघन माना जाएगा। प्रशासन ने कहा है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस विवाद में दोनों पक्षों के दावे मौजूद हैं। जहां कुछ संगठन अदीना मस्जिद को प्राचीन आदिनाथ शिव मंदिर बताते हैं, वहीं ASI के आधिकारिक रिकॉर्ड इसे 14वीं शताब्दी में निर्मित संरक्षित ऐतिहासिक मस्जिद के रूप में दर्ज करते हैं। मामले की कानूनी और ऐतिहासिक जांच अभी जारी है।
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