नई दिल्ली।हिंदी सिनेमा (Hindi cinema)के स्वर्णिम दौर में अगर किसी सिंगिंग जोड़ी (singing duo)ने सबसे ज्यादा जादू बिखेरा तो वह थी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar)और मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi)की जोड़ी। दोनों की आवाज का ऐसा असर था कि हर फिल्ममेकर(filmmaker) अपनी फिल्म में इनकी आवाज चाहता था। 1950 और 60 के दशक में इस जोड़ी ने दर्जनों सुपरहिट गाने दिए। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब दोनों दिग्गजों के बीच ऐसा विवाद हुआ कि उन्होंने साथ गाना छोड़ने तक की कसम खा ली।
दरअसल साल 1962 में गानों की रॉयल्टी को लेकर लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच मतभेद हो गया। लता मंगेशकर का मानना था कि गायकों को गानों की रॉयल्टी मिलनी चाहिए, जबकि मोहम्मद रफी इस विचार से सहमत नहीं थे। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने साथ काम न करने का फैसला कर लिया।
इसके बाद करीब चार से पांच साल तक दोनों ने कोई डुएट सॉन्ग रिकॉर्ड नहीं किया। इस दौरान मोहम्मद रफी ने आशा भोसले और सुमन कल्याणपुर जैसी गायिकाओं के साथ कई सुपरहिट गाने दिए। दूसरी तरफ लता मंगेशकर भी अपने सोलो गानों में व्यस्त रहीं। लेकिन धीरे-धीरे इंडस्ट्री में नई आवाजों की एंट्री होने लगी और इसका असर लता मंगेशकर के करियर पर भी पड़ने लगा।
इसी दौरान मशहूर संगीतकार एसडी बर्मन एक बड़ी फिल्म के लिए गाना तैयार कर रहे थे। उन्होंने इस गाने के लिए लता मंगेशकर को फोन किया। शुरुआत में लता ने गाने के लिए हामी भर दी, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि इस गाने में मोहम्मद रफी भी होंगे, उन्होंने तुरंत ऑफर ठुकरा दिया।