
इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) के सिंध प्रांत में प्रशासनिक और कृषि व्यवस्था की विफलता के चलते गेहूं (Wheat) का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह (Chief Minister Syed Murad Ali Shah) ने खुले बाजार में बढ़ती कीमतों पर गंभीर चिंता जताई है और जमाखोरी व मुनाफाखोरी पर रोक लगाने में नाकामी को भी स्वीकार किया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 4 जून तक खाद्य विभाग ने 10 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 79,835.66 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है, जो कुल लक्ष्य का 8% से भी कम है। सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य PKR 3,500 प्रति 40 किलो बाजार दर से काफी कम होने के कारण किसानों ने सरकारी एजेंसियों को गेहूं बेचने के बजाय निजी खरीदारों को अधिक दामों पर बेचना पसंद किया।
इस स्थिति का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है। खुले बाजार में गेहूं की कीमतों में लगभग 25% तक वृद्धि दर्ज की गई है। कराची में गेहूं का दाम PKR 11,100 प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि हैदराबाद में यह कीमत PKR 10,900 प्रति 100 किलोग्राम दर्ज की गई है।
इसी के चलते आटे की खुदरा कीमत PKR 135 से PKR 140 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी दर PKR 107 प्रति किलो है। इसका सबसे अधिक असर निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके लिए रोटी का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री शाह ने सीएम हाउस में उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमाखोरों और सट्टेबाजों को खाद्य सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को बाजार पर नियंत्रण और कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी रोकने के निर्देश दिए तथा नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कहा, “गेहूं सिर्फ एक वस्तु नहीं है, बल्कि लोगों की मूलभूत जरूरत और सामाजिक स्थिरता का आधार है।”
हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं दिख रहा है। जमाखोरी जारी है और सरकारी तंत्र की कमजोरियों के चलते सिंध प्रांत एक गहरे खाद्य संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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