
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने इस्राइल की जासूसी गतिविधियों को लेकर बड़ी चिंता जताई है। पेंटागन ने इस्राइल से जुड़े जासूसी के खतरे को बढ़ाकर गंभीर (क्रिटिकल) स्तर पर पहुंचा दिया है। यह पेंटागन का सबसे ऊंचा आंतरिक मूल्यांकन स्तर है। रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) ने इस संबंध में चेतावनी जारी की है। अमेरिकी रक्षा विभाग को डर है कि इस्राइल उनके वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी बढ़ा सकता है। यह स्थिति तब पैदा हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर मतभेद बढ़ गए हैं।
एक रिपोर्ट में दो मौजूदा और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने इस बात का खुलासा किया है। एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका पहले से ही इस्राइल के आधिकारिक दौरों पर सुरक्षा के बहुत कड़े इंतजाम करता है। इस्राइली जासूसी तंत्र को जानकारी जुटाने के मामले में बहुत आक्रामक माना जाता है। सुरक्षा के लिए अमेरिकी अधिकारी इस्राइल में अस्थायी कंप्यूटर और बर्नर फोन का इस्तेमाल करते हैं। वे बातचीत के लिए बहुत ही सीमित और सुरक्षित संचार नियमों का पालन करते हैं। पूर्व राजनयिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी अधिकारी इस्राइल में होटल के कमरों या किसी भी असुरक्षित जगह पर गोपनीय चर्चा करने से बचते हैं।
रक्षा खुफिया एजेंसी ने हाल के हफ्तों में एक आंतरिक नोटिस और सात पन्नों का एक दस्तावेज जारी किया है। इसमें इस्राइल की जासूसी क्षमताओं को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल इंसानी जासूसी और तकनीकी जासूसी, दोनों ही क्षेत्रों में बहुत ज्यादा सक्षम है। इस खतरे को अब गंभीर स्तर पर माना जाना चाहिए। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन अमेरिकी कर्मियों पर पड़ेगा जो इस्राइल की यात्रा करते हैं या इस्राइली अधिकारियों के साथ काम करते हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का सामान्य काम पहले की तरह ही चलता रहेगा।
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की एमिली हार्डिंग ने कहा कि इस्राइल का खुफिया ढांचा बहुत आक्रामक है। वे यह जानने में बहुत ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं कि अमेरिका क्या कर रहा है। हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस पूरी खबर को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी ऐसे व्यक्ति ने दी है जिसे घटनाओं की सही जानकारी नहीं है।
वहीं दूसरी ओर, वॉशिंगटन में इस्राइली दूतावास ने भी इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि इस्राइल अमेरिकी संस्थाओं या अधिकारियों की जासूसी नहीं करता। उन्होंने साफ किया कि इस्राइल की खुफिया गतिविधियां केवल दुश्मनों के खिलाफ होती हैं, दोस्तों के खिलाफ नहीं।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच यह तनाव हाल ही में एक फोन कॉल के दौरान खुलकर सामने आया। खबरों के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू को पागल तक कह दिया। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप इस बात से बहुत नाराज थे कि इस्राइल ने बेरूत पर फिर से हवाई हमले शुरू करने की धमकी दी थी। ट्रंप ने नेतन्याहू को चेतावनी दी कि इन हरकतों से इस्राइल की अंतरराष्ट्रीय छवि को बहुत नुकसान हो रहा है। ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से कहा, अब हर कोई आपसे नफरत करता है। इन वजहों से हर कोई इस्राइल से नफरत कर रहा है। यह स्थिति दिखाती है कि दोनों पुराने सहयोगियों के बीच रणनीतिक लक्ष्यों को लेकर दूरियां बढ़ती जा रही हैं।
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