
इंफाल। मणिपुर (Manipur) में शांति बहाली (Restoration of peace.) के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) ने एक सख्त और ठोस कार्ययोजना तैयार की है। राज्य में सक्रिय उपद्रवियों के खिलाफ अब सुरक्षा बल निर्णायक प्रहार करेंगे। सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) जीपी सिंह ने मणिपुर में तैनात अपने जवानों और अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपद्रवियों के खात्मे के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह स्वतंत्र हैं। उन्होंने जवानों को खुली छूट देते हुए भरोसा दिलाया कि एक साल के भीतर मणिपुर के हालात पूरी तरह सामान्य हो जाएंगे।
विभागीय सवाल, कानूनी पचड़ों की न करें चिंता
डीजी जीपी सिंह ने जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए साफ कहा कि यदि उपद्रवियों पर सुरक्षा बल गोली नहीं चलाएंगे, तो सरकार ने उन्हें गोला-बारूद क्यों दिया है? उन्होंने जवानों को आश्वस्त किया कि वे किसी भी कार्रवाई के बाद विभागीय सवालों या कानूनी पचड़ों की चिंता न करें। डीजी ने कहा कि जब तक वे पद पर हैं, वास्तविक और प्रामाणिक कार्रवाई के दौरान जवानों पर कोई आंच नहीं आएगी। यह सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है।
जीपी सिंह ने जवानों से कहा कि यहां पर दो तरह की समस्या हैं। पहला, हथियार वाले मिलिटेंट हैं। वे चाहे किसी सरेंडर किए हुए समूह के सदस्य हैं या फिर सक्रिय उग्रवादी समूहों के मेंबर हैं। वे हथियारों का नाजायज उपयोग कर रहे हैं। दूसरा, उन्हीं से संबंधित कानून व्यवस्था का विषय है। वहां पर कई समूह, हथियारबंद लोगों को ऐसा माहौल देते हैं कि जिससे वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में अशांति फैला सकें। ऐसे में हमारे सुरक्षा बलों को सूक्ष्म तरीके से रणनीति बनाकर इन दोनों पर प्रहार करना होगा।
कोई उपद्रवी हथियार लेकर सिविलियन एरिया में घूम रहा है तो उसे खत्म करना है। कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सीआरपीएफ डीजी ने कहा, ऐसे लोगों को पहले चेतावनी दी जाए, फिर बल प्रयोग करने में संकोच न करें। पुलिस व केंद्रीय बलों को इसके लिए अग्रिम रणनीति बनानी होगी। उन्हें यह देखना है कि अब 24 घंटे या उससे आगे की अवधि में क्या हो सकता है।
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