
नई दिल्ली: एयर इंडिया का विमान एआई-171 अहमदाबाद में उड़ान भरने के तुरंत बाद 12 जून 2025 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. अब पीड़ित परिवारों के साथ किए जा रहे क्लेम सेटलमेंट का पूरा प्रोसेस सवालों के घेरे में आ गया है. इस दुर्घटना में जिन 260 लोगों की मौत हुई थी, उनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी शामिल थे. अब उनकी लंदन में रह रहीं बेटी राधिका मिश्रा ने यह सवाल उठाया है कि आखिर क्यों एयर इंडिया की ओर से आधिकारिक जांच पूरी होने से पहले ही “फुल एंड फाइनल” सेटलमेंट पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं.
पूर्व गुजरात सीएम विजयभाई रूपाणी की बेटी राधिका मिश्रा ने Tata Sons चेयरमैन N. Chandrasekaran को पत्र लिखकर सवाल किया है कि जांच पूरी होने से पहले परिवारों पर “फुल एंड फाइनल” सेटलमेंट साइन करने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है. राधिका ने आरोप लगाया कि सेटलमेंट दस्तावेज़ में एयर इंडिया के साथ बोईंस, GE, Safran, Honeywell और सरकारी एजेंसियों तक को दायित्व से मुक्त किया जा रहा है, जबकि हादसे की वजह अभी तय नहीं हुई.
राधिका के इस सवाल पर अब एयर इंडिया की तरफ से सफाई में कहा गया है कि एआई-171 को लेकर जांच रिपोर्ट जारी होने से पहले पीड़ित परिवारों के ऊपर अंतिम राहत पैकेज को स्वीकार करने के लिए किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है.
एयर इंडिया ने रुपानी परिवार को सफाई देते हुए बताया है कि किसी भी परिवार या व्यक्ति पर तय समय-सीमा में ऑफर स्वीकार करने का कोई दबाव नहीं है. जो परिवार AAIB की जांच रिपोर्ट का इंतज़ार करना चाहते हैं वे ऐसा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं.
एयर इंडिया ने यह भी बताया कि अक्टूबर 2025 में अंतिम मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की गई थी जब अधिकांश अंतरिम भुगतान पूरे हो चुके थे. एयरलाइन ने बताया कि उसने हादसे के दो माह बाद से ही 25 लाख रुपये की अंतरिम राशि देनी शुरू की थी जो बाद में अंतिम मुआवजे में समायोजित की जाएगी. Receipt, Discharge & Indemnity यानी RDI दस्तावेज़ की भाषा को लेकर जो आपत्ति जताई गई थी उस पर एयर इंडिया ने सफाई दी- एयरलाइन ने कहा कि यह भाषा अंतरराष्ट्रीय और भारतीय दोनों स्तरों पर एयरलाइनों की सामान्य प्रक्रिया के अनुसार है.
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