वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच ओमान की मध्यस्थता में जारी बैकचैनल (back channel) बातचीत के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका ईरान के शेष परमाणु ढांचे को निशाना बनाने पर विचार कर सकता है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर किसी संभावित सैन्य कार्रवाई या कथित लक्ष्य सूची की पुष्टि नहीं की है।
रिपोर्टों के अनुसार, संभावित सैन्य योजना में केवल नतांज के पास स्थित ‘पिकैक्स माउंटेन’ ही नहीं, बल्कि ईरान की कई अन्य संवेदनशील परमाणु सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्टों में जिन पांच ठिकानों का जिक्र
1. पिकैक्स माउंटेन (नतांज के पास)
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नतांज के निकट ग्रेनाइट पहाड़ियों के भीतर स्थित यह भूमिगत परिसर ईरान की सबसे सुरक्षित परमाणु सुविधाओं में गिना जाता है। दावा है कि यहां आधुनिक सेंट्रीफ्यूज रखे गए हैं और इसकी गहराई के कारण इसे सैन्य दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण लक्ष्य माना जाता है।
2. तालेघन-2 (पारचिन सैन्य परिसर)
रिपोर्टों में कहा गया है कि पारचिन कॉम्प्लेक्स के भीतर स्थित इस परिसर में उच्च-विस्फोटक परीक्षणों से जुड़ी गतिविधियां होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
3. फोर्डो की सपोर्ट सुविधा
फोर्डो परमाणु केंद्र से जुड़ी इस सतही सुविधा को लेकर दावा किया गया है कि यहां ऐसे उपकरण और सेंट्रीफ्यूज मौजूद हैं, जिनका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को दोबारा सक्रिय करने में किया जा सकता है।
4. इस्फहान की भूमिगत सुरंगें
कुछ रिपोर्टों में इस्फहान स्थित परमाणु परिसर की सील की गई सुरंगों में गतिविधियां बढ़ने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि यहां भारी वाहनों की आवाजाही देखी गई है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
5. नतांज परिसर की शेष सुविधाएं
रिपोर्टों के अनुसार, पहले हुए हमलों के बावजूद नतांज की कुछ अनुसंधान और सहायक इमारतें अब भी रणनीतिक महत्व रखती हैं और संभावित सैन्य योजनाओं में शामिल मानी जा रही हैं।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
पूर्व अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षक डेविड अलब्राइट के हवाले से कहा गया है कि भले ही ईरान के कई प्रमुख परमाणु ठिकानों को पहले नुकसान पहुंच चुका हो, लेकिन यदि पुनर्निर्माण और नई गतिविधियां जारी रहती हैं तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। उनके अनुसार, भूमिगत सुविधाएं ईरान की परमाणु क्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कूटनीति पर टिकी अगली दिशा
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच ओमान के माध्यम से बातचीत जारी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष कूटनीतिक समाधान तक पहुंच पाते हैं या नहीं। यदि वार्ता सफल रहती है तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, जबकि असफलता की स्थिति में पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात और जटिल होने की आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से लंबे समय से इस कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई जाती रही है। दोनों पक्षों के दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग आकलन सामने आते रहे हैं।
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