
नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global energy market) की चिंताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच बहुप्रतीक्षित समझौते पर 14 जून को हस्ताक्षर होने वाले हैं. उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक बदलाव करार देते हुए कहा कि डील के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को तत्काल प्रभाव से खोल दिया जाएगा.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है. उनके मुताबिक, यह डील इस बात की गारंटी देगी कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. ट्रंप ने इस समझौते को न्यूक्लियर हथियार न बनाने की दीवार बताया. उन्होंने कहा कि ईरान अब किसी भी माध्यम से परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि समझौते के तहत ईरान को परमाणु हथियार खरीदने, विकसित करने या किसी अन्य तरीके से हासिल करने की अनुमति नहीं होगी. उनका दावा है कि इस व्यवस्था से क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी. ट्रंप ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए दोबारा खोल दिया जाएगा.
वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, इसलिए इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों को भी राहत मिल सकती है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका भविष्य में ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट के साथ मिलकर काम करने को लेकर आशावादी है. उन्होंने कहा, “हम भविष्य में ईरान और मिडिल ईस्ट के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं.”
अपने बयान में ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर भी निशाना साधा. उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में ईरान के साथ हुए वित्तीय समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार किसी प्रकार का प्रत्यक्ष वित्तीय भुगतान नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ओबामा प्रशासन के दौरान ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान किया गया, जिसमें 1.7 अरब डॉलर राशि भी शामिल थी.
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ईरान के परमाणु ढांचे की निगरानी और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया जारी रह सकती है. उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो भूमिगत परमाणु सुविधाओं समेत ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को नियंत्रित करने के लिए उन्नत सैन्य क्षमताओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि विपरीत स्थिति में उनके पास दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं.
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