नई दिल्ली। जरा सोचिए, आप किसी ऐसे शहर में पहुंचें जहां सड़क पर चलते हर कुछ कदम बाद एक जैसी शक्ल (A shape like) वाले लोग नजर आने लगें। दुकान पर जाएं तो दो एक जैसे दुकानदार, स्कूल के बाहर दो हमशक्ल बच्चे और पार्क में खेलते ऐसे युवक जिन्हें देखकर लगे मानो किसी ने एक चेहरे की कई कॉपी बना दी हो। पहली नजर में आपको लग सकता है कि शायद आंखों का भ्रम है या आप किसी फिल्मी दुनिया में आ गए हैं। लेकिन दुनिया में एक ऐसी जगह सचमुच मौजूद है, जहां यह नजारा आम बात है।
अफ्रीकी देश नाइजीरिया के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में बसा छोटा-सा शहर इग्बो-ओरा दुनिया भर में “ट्विन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” यानी जुड़वां बच्चों की राजधानी के नाम से मशहूर है। करीब दो लाख की आबादी वाले इस इलाके में जुड़वां बच्चों का जन्म इतनी बड़ी संख्या में होता है कि यहां एक जैसे चेहरे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।
क्यों खास है इग्बो-ओरा?
इग्बो-ओरा की पहचान सिर्फ जुड़वां बच्चों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की संस्कृति में भी इसका खास महत्व है। शहर के बीचोंबीच एक स्मारक बना है, जिसमें एक मां अपनी गोद में जुड़वां बच्चों को थामे दिखाई देती है। यह यहां की पहचान और सामाजिक गर्व का प्रतीक माना जाता है।
दुनिया में आमतौर पर जुड़वां बच्चों का जन्म दुर्लभ माना जाता है। एक वैश्विक अध्ययन के मुताबिक, हर 1,000 प्रसव में औसतन करीब 12 जुड़वां बच्चे जन्म लेते हैं। लेकिन इग्बो-ओरा में यह आंकड़ा हैरान कर देता है। यहां हर 1,000 जीवित जन्मों पर लगभग 45 से 50 जुड़वां जोड़े पैदा होते हैं।
वैज्ञानिक लंबे समय से इस रहस्य को समझने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका संबंध यहां के पारंपरिक भोजन से हो सकता है। इग्बो-ओरा में लोग बड़ी मात्रा में रतालू (याम) खाते हैं, जिसमें फाइटोएस्ट्रोजन नाम का रासायनिक तत्व पाया जाता है।
माना जाता है कि यह तत्व महिलाओं के शरीर में अंडाशय को उत्तेजित कर सकता है, जिससे एक बार में एक से ज्यादा अंडे रिलीज होने की संभावना बढ़ जाती है। चिकित्सा विज्ञान में इसे मल्टीपल ओव्यूलेशन कहा जाता है, जो जुड़वां बच्चों के जन्म की संभावना बढ़ा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल खानपान ही इसकी वजह नहीं है। पीढ़ियों से सीमित दायरे में शादियां होने के कारण यहां का जीन पूल भी इस स्थिति के अनुकूल विकसित हो चुका हो सकता है।
यहां जुड़वां बच्चों को माना जाता है सौभाग्य
इग्बो-ओरा में जुड़वां बच्चों को सिर्फ जैविक घटना नहीं, बल्कि ईश्वर का आशीर्वाद माना जाता है। स्थानीय परंपरा में जुड़वां बच्चों को खुशहाली और सुरक्षा का प्रतीक समझा जाता है।
जब किसी घर में जुड़वां बच्चे जन्म लेते हैं, तो परिवार बीन्स बनाकर पूरे मोहल्ले में बांटता है। यह खुशियां साझा करने की एक खास परंपरा मानी जाती है। इसी अनोखी पहचान को दुनिया तक पहुंचाने के लिए यहां हर साल 11 अक्टूबर को वर्ल्ड ट्विन्स फेस्टिवल भी आयोजित किया जाता है, जिसमें दुनिया भर से जुड़वां लोग हिस्सा लेने पहुंचते हैं।
भारत में भी है ‘ट्विन कैपिटल’
सिर्फ नाइजीरिया ही नहीं, भारत में भी एक ऐसी जगह है जहां जुड़वां बच्चों की संख्या वैज्ञानिकों को चौंकाती है। केरल के मलप्पुरम जिले का कोडिन्ही गांव “भारत की ट्विन कैपिटल” के नाम से जाना जाता है।
करीब 2,000 परिवारों वाले इस गांव में 450 से ज्यादा जुड़वां जोड़े रहते हैं। यानी 900 से अधिक ऐसे लोग, जिनकी शक्लें एक-दूसरे से मिलती हैं। भारत में जहां जुड़वां बच्चों की जन्म दर अपेक्षाकृत कम है, वहीं कोडिन्ही का आंकड़ा वैश्विक औसत से भी कहीं ज्यादा है।
वैज्ञानिकों ने ब्राजील और भारत की ऐसी जगहों पर भी शोध किए हैं, लेकिन इग्बो-ओरा जैसा लगातार उच्च जुड़वां जन्म दर वाला उदाहरण दुनिया में बेहद दुर्लभ माना जाता है।
इग्बो-ओरा आज भी लोगों के लिए एक रहस्य बना हुआ है। विज्ञान इसकी वजहें तलाशने में जुटा है, लेकिन यहां के लोगों के लिए यह प्रकृति का आशीर्वाद है—एक ऐसी जगह, जहां जिंदगी सचमुच दोगुनी खुशियों के साथ जन्म लेती है।
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