
नई दिल्ली। एयर इंडिया की फ्लाइट 171 के क्रैश मामले (Air India Flight 171 crash case) में एक नया मोड़ आ गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (Federation of Indian Pilots- FIP) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती यानी अंतरिम जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पायलट्स की संस्था का आरोप है कि जांच रिपोर्ट में जानबूझकर कॉकपिट वॉर्निंग डेटा (को छिपाया गया है।
पायलट्स एसोसिएशन का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर जो स्वतंत्र सिम्युलेटर टेस्ट कराए हैं, उसने जांच रिपोर्ट की टाइमलाइन और नतीजों की पोल खोल दी है।
क्या हैं पायलट्स एसोसिएशन के मुख्य आरोप?
शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान FIP के अध्यक्ष कैप्टन सी. रंधावा ने दुर्घटना को लेकर कई अहम बातें रखीं। कैप्टन रंधावा ने कहा कि दोनों इंजन फेल होने से पहले विमान में इलेक्ट्रिकल फेल्योर (बिजली गुल होना) हुआ था। इस तरह की खराबी आने पर कॉकपिट में चेतावनी संदेशों की झड़ी लग जानी चाहिए थी और ऑडियो अलर्ट बजने चाहिए थे। ये सब कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) में दर्ज होता है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट में जानबूझकर इस वॉर्निंग सीक्वेंस का जिक्र नहीं किया गया है।
10 सिम्युलेटर टेस्ट में सामने आई ये सच्चाई
AAIB द्वारा खुद का सिम्युलेटर टेस्ट करने से बार-बार इनकार करने के बाद, FIP ने एक बोइंग 787 सिम्युलेटर पर 10 टेस्ट कराए। इन टेस्ट के नतीजे जांच एजेंसी के दावों के बिल्कुल उलट थे। राम एयर टर्बाइन (RAT) विमान की इमरजेंसी पावर सप्लाई होती है। टेस्ट में सामने आया कि इंजन बंद होने के बाद RAT को चालू होने और हाइड्रोलिक प्रेशर बहाल करने में 18 सेकंड का समय लगता है।
वहीं, AAIB की अंतरिम रिपोर्ट का दावा है कि इंजनों की ईंधन सप्लाई बंद करने वाले स्विच के दबने के महज 4 सेकंड बाद ही RAT डिप्लॉय (चालू) हो गया था। इस बड़े अंतर को देखते हुए संस्था ने सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि 12 जून 2025 को हुए इस हादसे की अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले AAIB खुद सिम्युलेटर टेस्ट करे।
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) के डैमेज होने पर गहराया रहस्य
कैप्टन रंधावा ने विमान के पिछले हिस्से (टेल) में लगे फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के डैमेज होने पर भी हैरानी जताई। उन्होंने सवाल पूछा कि जब क्रैश के बाद विमान का पिछला हिस्सा काफी हद तक सुरक्षित मिला था, तो फिर वहां मौजूद FDR इतनी बुरी तरह कैसे डैमेज हो गया? चूंकि यह रिकॉर्डर पूरी तरह से इलेक्ट्रिक पावर से चलता है, इसलिए इसका डैमेज होना इस बात का साफ इशारा है कि विमान की इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई में कोई बड़ी दिक्कत आई थी।
‘हमारे कप्तानों की मौत हो चुकी है, उन्हें बचाने वाला कोई नहीं’
अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए कैप्टन रंधावा ने साल 2009 के मशहूर ‘मिरेकल ऑन द हडसन’ (हडसन नदी के चमत्कार) का उदाहरण दिया। तब अमेरिकी फ्लाइट के कैप्टन चेस्ली ‘सली’ सलेनबर्गर ने टेकऑफ के तुरंत बाद एक खराब विमान को सुरक्षित तरीके से हडसन नदी में उतार दिया था।
अमेरिकी जांच एजेंसी ने शुरुआत में कैप्टन सली को ही नदी में विमान उतारने के फैसले के लिए दोषी ठहराया था। हालांकि, जब जांच एजेंसी ने 30-35 सिम्युलेटर टेस्ट किए, तो उन्हें पता चला कि वह विमान किसी भी हाल में समय पर रनवे तक वापस नहीं पहुंच सकता था। इसके बाद ही कैप्टन सली को बेदाग करार दिया गया। अंत में कैप्टन रंधावा ने कहा, “कैप्टन सली अपना बचाव करने के लिए जिंदा थे। यहां हमारे कप्तानों की मौत हो चुकी है और उन्हें बचाने वाला वहां कोई नहीं है।”
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved