वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच हाल ही में हुए समझौते को अमलीजामा पहनाने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड (Switzerland) के ब्यूर्गेनस्टॉक में रविवार से महत्वपूर्ण शांति वार्ता शुरू होने जा रही है। इस बहुपक्षीय बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने की दिशा तय हो सकती है।
वार्ता में भाग लेने के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुंच रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए रवाना हो चुके हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री अन्य देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा ले सकते हैं।
ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वरिष्ठ नेता और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुरक्षा मामलों के अधिकारी, केंद्रीय बैंक के प्रतिनिधि और ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं।
वहीं अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। अमेरिकी दल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगियों और विशेष दूतों को भी शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि दोनों पक्ष समझौते की शर्तों को लागू करने, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हिज्बुल्लाह के साथ संघर्ष विराम लागू होने के कुछ ही समय बाद इजरायल ने लेबनान में कई हवाई हमले किए। लेबनानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में कई लोगों की जान गई है, जबकि इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई सीमा पार से हुए रॉकेट हमलों के जवाब में की गई।
विश्लेषकों का मानना है कि लेबनान की स्थिति और इजरायल-हिज्बुल्लाह संघर्ष भी वार्ता के दौरान प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकते हैं।
वार्ता शुरू होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि 60 दिनों के युद्धविराम काल के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का टोल नहीं लगाया जाएगा।
हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में स्थायी शांति समझौता नहीं हो पाया, तो अमेरिका भविष्य में समुद्री सुरक्षा सेवाओं के बदले टोल वसूलने पर विचार कर सकता है। उनके इस बयान को क्षेत्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्विट्जरलैंड में होने वाली यह बैठक केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों तक सीमित नहीं मानी जा रही है। इसके परिणामों का असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा, तेल बाजार, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।
अब देखना होगा कि दोनों देशों के बीच हालिया समझौते को लागू करने के लिए ठोस रोडमैप तैयार होता है या क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बातचीत की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
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