नई दिल्ली। बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच (Mahrang Baloch) को उम्रकैद की सजा दिए जाने के बाद पाकिस्तान (Pakistan) एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के घेरे में आ गया है। स्वीडन की चर्चित जलवायु कार्यकर्ता ने (Greta Thunberg) ने एक वीडियो संदेश जारी कर पाकिस्तान सरकार और सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं तथा महरंग बलोच की तत्काल रिहाई की मांग की है।
ग्रेटा थनबर्ग ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और असहमति को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार महरंग बलोच को मार्च 2025 में क्वेटा में आयोजित एक शांतिपूर्ण धरने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यह प्रदर्शन कथित रूप से लापता लोगों और न्यायेतर हत्याओं के मामलों में जवाबदेही की मांग को लेकर आयोजित किया गया था।
ग्रेटा ने अपने संदेश में कहा कि महरंग वर्षों से बलूचिस्तान में मानवाधिकारों और लापता व्यक्तियों के परिवारों के लिए आवाज उठाती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के बाद महरंग को लंबे समय तक हिरासत में रखा गया, जहां उन्हें एकांतवास, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े मामलों का सामना करना पड़ा।
वीडियो संदेश में ग्रेटा ने यह भी दावा किया कि महरंग का मुकदमा एक उच्च सुरक्षा वाली जेल परिसर के भीतर बंद दरवाजों के पीछे चलाया गया। उनके मुताबिक इससे न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मानवाधिकार वकील Iman Mazari का भी उल्लेख किया, जिन्होंने महरंग का कानूनी पक्ष रखा था।
ग्रेटा ने कहा कि इमान मजारी भी नागरिक अधिकारों और सरकारी नीतियों की आलोचना को लेकर कानूनी दबाव का सामना कर रही हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को जेल में डालकर सच की आवाज को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता और किसी आंदोलन के नेताओं को निशाना बनाकर पूरे आंदोलन को खत्म नहीं किया जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील करते हुए ग्रेटा थनबर्ग ने महरंग बलोच और अन्य बंद कार्यकर्ताओं के समर्थन में आवाज उठाने, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दुनिया अब इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
इस मामले पर केवल ग्रेटा ही नहीं, बल्कि कई मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है। International Human Rights Foundation (IHRF) ने महरंग बलोच और सिबगतुल्लाह शाह को सुनाई गई उम्रकैद की सजा की आलोचना करते हुए कहा कि मुकदमे की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं दिखाई देती। संगठन का आरोप है कि सुनवाई जेल परिसर में स्थापित विशेष अदालत में हुई, जहां आरोपियों को पर्याप्त कानूनी अधिकार और बचाव का पूरा अवसर नहीं मिला।
महरंग बलोच के मामले ने पाकिस्तान में मानवाधिकारों, न्यायिक प्रक्रिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती प्रतिक्रियाओं के बीच इस प्रकरण पर पाकिस्तान सरकार की ओर से आने वाले जवाब पर भी नजरें टिकी हुई हैं।
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