अयोध्या। राम मंदिर (Ram Temple) में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट में चढ़ावे की रकम में हेराफेरी, गणना प्रक्रिया में अनियमितताओं, भर्ती में कथित पक्षपात और कमीशनखोरी जैसे मामलों के संकेत मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी गई है, जिसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
एसआईटी के सदस्य लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने मंगलवार को अपनी गोपनीय रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंपी। अब यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जाएगी, जहां आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, जांच में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में यह आशंका व्यक्त की गई है कि चढ़ावे की गणना और प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं में गंभीर खामियां थीं, जिनका लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। कुछ अधिकारियों को प्रत्यक्ष भूमिका और कुछ को निगरानी में लापरवाही के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के कथित साक्ष्य भी मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में कुछ ऐसे वीडियो रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया गया है, जिनसे गणना प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। सूत्रों का दावा है कि 25 से 30 लोगों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में गणनाकर्मियों, संविदा कर्मचारियों और कुछ बाहरी व्यक्तियों के नामों का भी उल्लेख होने की चर्चा है। इसके अलावा ट्रस्ट पदाधिकारियों के रिश्तेदारों और करीबी लोगों की भूमिका की भी जांच की गई है। कई गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य रिपोर्ट का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
जांच में चढ़ावे की गणना व्यवस्था में बैंक कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत की आशंका जताई गई है। वहीं, संविदाकर्मियों के भरोसे पूरी गणना प्रक्रिया छोड़ना और नियुक्तियों में कथित सिफारिशों को प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं। जांच में कहा गया है कि मंदिर परिसर से कथित रूप से रकम बाहर जाती रही, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और तैनात पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। इस कारण सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ कर्मियों की जवाबदेही भी तय किए जाने की बात कही गई है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना गया है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष और कानूनी कार्रवाई सरकार तथा संबंधित जांच एजेंसियों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और आगे विस्तृत जांच शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
राम मंदिर जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित कानूनी कदमों पर टिकी है।
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