
जबलपुर। जिले में अवैध कॉलोनियों और बिना वैधानिक अनुमति के प्लॉटिंग का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन और कॉलोनी सेल की कार्रवाई सीमित फाइलों तक सिमटती दिखाई दे रही है, जबकि जमीन पर कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। ऐसा ही मामला शहर के बाहरी क्षेत्र में विकसित की जा रही च्कृष्णा धामज् कॉलोनी का सामने आया है, जहां स्थानीय लोगों ने बिल्डर पर बिना आवश्यक अनुमतियों के प्लॉटिंग और मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कॉलोनी को संबंधित विभागों से मंजूरी नहीं मिली है तो वहां प्लॉट बिक्री और बिजली जैसी व्यवस्थाएं आखिर किस आधार पर संचालित हो रही हैं? और यदि सब कुछ नियमों के विरुद्ध हो रहा है तो जिम्मेदार विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए?
क्या कहते हैं नियम?
किसी भी वैध कॉलोनी के विकास से पहले संबंधित विभागों से स्वीकृत लेआउट के आधार पर अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिजली व्यवस्था के लिए विद्युत वितरण कंपनी के सहायक अभियंता से लेआउट स्वीकृत कराया जाता है। इसके बाद ट्रांसफार्मर, विद्युत पोल, केबल और अन्य अधोसंरचना का भार निर्धारित कर शुल्क जमा कराया जाता है। विभाग की स्वीकृति के बाद अधिकृत ठेकेदार कार्य करता है और निरीक्षण के बाद ही बिजली आपूर्ति नियमित रूप से शुरू की जाती है।
बिना ट्रांसफार्मर बिजली?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कृष्णा धाम कॉलोनी में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कॉलोनी के लिए अलग ट्रांसफार्मर स्थापित करने के बजाय आसपास मौजूद विभागीय ट्रांसफार्मर से ही बिजली आपूर्ति की जा रही है। साथ ही अस्थायी खंभों और पतली केबलों का उपयोग किए जाने की भी शिकायत की गई है। यदि ये आरोप सही हैं तो इससे न केवल विद्युत व्यवस्था पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है, बल्कि सुरक्षा संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं।
बढ़ सकता है ट्रांसफार्मर पर लोड
क्षेत्रवासियों का कहना है कि गर्मी और मानसून के दौरान पहले से ही बिजली आपूर्ति प्रभावित रहती है। ऐसे में यदि अतिरिक्त लोड अनधिकृत रूप से विभागीय ट्रांसफार्मर पर डाला जा रहा है तो उसके खराब होने या जलने की आशंका बढ़ सकती है। इससे आसपास के हजारों उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।
सड़क, नाली और सीवेज का भी अभाव?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कॉलोनी में अब तक पक्की सड़क, नाली, सीवेज और स्थायी विद्युत व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं की गई हैं। इसके बावजूद प्लॉटों की बिक्री जारी है। यदि कॉलोनी वैधानिक रूप से स्वीकृत नहीं है तो भविष्य में यहां प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भी कई प्रशासनिक और कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कॉलोनी सेल की चुप्पी पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक जिले में कई अवैध कॉलोनियों को लेकर कॉलोनी सेल द्वारा रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रभावशाली बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई करने से अधिकारी बच रहे हैं, या फिर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है?
प्रशासन से उठी जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग तथा विद्युत वितरण कंपनी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि बिना अनुमति प्लॉटिंग, अनधिकृत बिजली कनेक्शन या अन्य नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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