
लंदन। यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी और लू (Heat and Heatwaves) की चपेट में है। कई देशों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। इसी बीच ब्रिटेन (Britain) में बढ़ती गर्मी के बावजूद कुछ क्षेत्रों में प्रशासन ने घरों में लगे एयर कंडीशनर (AC) हटाने के निर्देश जारी किए हैं। स्थानीय काउंसिल अधिकारियों का कहना है कि एसी का उपयोग केवल अंतिम विकल्प के रूप में किया जाना चाहिए।
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन का तर्क है कि एयर कंडीशनर के अधिक उपयोग से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, जो पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए लोगों को पहले प्राकृतिक तरीकों से घर ठंडा रखने की सलाह दी जा रही है।
ब्रिटेन के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। भीषण हीटवेव के चलते कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं, ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं और मौसम विभाग ने लोगों की जान को खतरा बताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।
गर्मी और सीमित कूलिंग सुविधाओं का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई अस्पतालों में पर्याप्त कूलिंग व्यवस्था नहीं होने के कारण हजारों सर्जरी टालनी पड़ी हैं। अनुमान है कि देशभर में 4,000 से अधिक ऑपरेशन फिलहाल स्थगित किए गए हैं।
नेट-जीरो नीति के तहत एसी पर नियंत्रण
ब्रिटेन, खासकर लंदन में, नेट-जीरो पॉलिसी के तहत भवनों में ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया जा रहा है। इस नीति के अनुसार, एयर कंडीशनर जैसी एक्टिव कूलिंग तकनीकों का उपयोग तभी किया जाना चाहिए, जब प्राकृतिक या पैसिव कूलिंग के सभी विकल्प अपनाने के बाद भी राहत न मिले।
लंदन के मेयर सादिक खान पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की मुहिम को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी क्रम में कैमडेन काउंसिल क्षेत्र के कुछ फ्लैटों से एयर कंडीशनर हटवाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे घरों में हवा के बेहतर प्रवाह के लिए खिड़कियां खुली रखें, सीलिंग फैन का इस्तेमाल बढ़ाएं और एसी का उपयोग केवल अत्यधिक जरूरत की स्थिति में ही करें।
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