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राम मंदिर चढ़ावा मामला: आचार्य प्रमोद कृष्णम ने CBI जांच की मांग की, बोले- ‘धर्म संसद बुलाएंगे, ट्रस्ट के सभी सदस्य दें इस्तीफा’

June 30, 2026

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir offering theft case) को लेकर कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम (Pramod Krishnam) ने राज्य सरकार की एसआईटी जांच पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मामला केवल अयोध्या या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का विषय है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच जरूरी है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाला गंभीर मामला है।



  • धर्म संसद बुलाने का ऐलान

    आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि इस मुद्दे पर जल्द ही धर्म संसद बुलाई जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के सभी सदस्यों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल अपने पद छोड़ने की मांग भी की।

    उनका कहना था कि जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, उनके पीछे यदि कोई अन्य प्रभावशाली व्यक्ति या नेटवर्क है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाना आवश्यक है कि यदि लंबे समय तक अनियमितताएं होती रहीं तो उन्हें संरक्षण किस स्तर पर मिला।

    ‘देशभर की आस्था को पहुंची ठेस’

    आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि श्रीराम मंदिर देश-विदेश के करोड़ों हिंदुओं की श्रद्धा का केंद्र है और इस तरह के मामले से लोगों का विश्वास प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था बनाए रखने के लिए पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    ‘इस मुद्दे पर सभी को बोलने का अधिकार’

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं का जिक्र करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यदि किसी धार्मिक संस्थान में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं तो उस पर अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है।

    उन्होंने कहा कि चाहे वे लोग हों जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई हो या वे जिन्होंने उसमें भाग न लिया हो, इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

    प्रधानमंत्री से जताया भरोसा

    आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि किसी भी स्तर पर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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