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बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पाकिस्तान: हैसियत भूले मंत्री मलिक, अनर्गल टिप्पणी में दिखी बौखलाहट

June 30, 2026

इस्लामाबाद। भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान की बेचैनी लगातार बढ़ती दिख रही है। एक ओर पाकिस्तान के कई इलाके गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं और किसान सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वहां के मंत्री भारत को गीदड़भभकी देने में जुटे हैं। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसद्दिक मलिक ने कहा है कि कोई भी हमारे पानी को छूने की हिम्मत नहीं कर सकता है।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी भारत को लेकर कहा कि पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री पाकिस्तान को पानी की एक बूंद भी नहीं देने की बात कर रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि को कोई एक देश एकतरफा समाप्त नहीं कर सकता। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था और साफ कर दिया था कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इनमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि भारत का पानी उन लोगों तक नहीं पहुंचेगा, जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संबंध सामान्य नहीं हो सकते।


  • पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान के कई हिस्सों में पानी की भारी कमी देखी जा रही है। इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। कई किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी, तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। जल संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लाखों लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

    सिंधु नदी पर बना सुक्कुर बैराज पाकिस्तान की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। यह सिंध और बलूचिस्तान के लाखों एकड़ खेतों को पानी उपलब्ध कराता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1 प्रतिशत, राइस कैनाल में 38 प्रतिशत और दादू कैनाल में 82 प्रतिशत तक पानी की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो पाकिस्तान के कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    जल संकट के बीच पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों के बीच भी विवाद बढ़ने लगा है। सिंध प्रांत ने पंजाब पर अपने हिस्से से अधिक पानी लेने का आरोप लगाया है। सिंध का कहना है कि ऊपरी क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा पानी रोके जाने के कारण निचले इलाकों में हालात और खराब हो गए हैं। इससे न केवल जल संकट गहरा रहा है, बल्कि राजनीतिक तनाव भी बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनी, तो पाकिस्तान को आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

    ये भी माना जा रहा है कि पाकिस्तान के नेताओं के हालिया बयान देश के भीतर बढ़ते दबाव और संकट की ओर इशारा करते हैं। एक ओर देश आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और जल संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के सख्त रुख ने उसकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। ऐसे में पाकिस्तान के नेताओं की तीखी बयानबाजी को घरेलू दबाव से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

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