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पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, ब्रिटिश सांसदों ने पाकिस्तान से प्रतिबंध हटाने की मांग की

July 03, 2026

लाहौर। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में पिछले एक महीने से जारी विरोध प्रदर्शन, लॉकडाउन और संचार प्रतिबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ने लगी है। ब्रिटेन के सर्वदलीय संसदीय समूह (APPG Kashmir) ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के साथ एक आपात बैठक आयोजित कर क्षेत्र की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई और पाकिस्तान सरकार से तत्काल प्रतिबंध हटाने, इंटरनेट सेवाएं बहाल करने तथा मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

एक महीने से जारी हैं प्रदर्शन

बैठक के बाद जारी बयान में APPG के सदस्यों ने कहा कि रावलकोट, मीरपुर, मुजफ्फराबाद, कोटली समेत कई प्रमुख शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार 30वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं। प्रदर्शन और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण बाजार, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन लंबे समय से प्रभावित हैं, जिससे आम लोगों का जीवन कठिन हो गया है।

आवश्यक वस्तुओं की कमी का दावा

ब्रिटिश सांसदों ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ इलाकों में बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो मानवीय संकट और गहरा सकता है।

इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बहाल करने की मांग

APPG ने पाकिस्तान सरकार से मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं को तत्काल बहाल करने की अपील की। समूह का कहना है कि संचार सेवाएं बंद रहने से लोग अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जबकि राहत कार्यों और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है।

ब्रिटिश सरकार से कूटनीतिक पहल की अपील

ब्रिटिश सांसदों ने अपनी सरकार से भी आग्रह किया कि वह पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर प्रभावित क्षेत्रों में खाद्यान्न, जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कराए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवीय एजेंसियों, मानवाधिकार संगठनों और स्वतंत्र पत्रकारों को पीओके में प्रवेश की अनुमति देने की भी मांग की गई।



  • प्रदर्शनकारियों के आरोप

    प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी प्रशासन और सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए आंसू गैस, रबर की गोलियों और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया है। उनका कहना है कि वे महंगाई, बिजली संकट, संसाधनों के दोहन और क्षेत्र में सेना के प्रभाव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी नागरिक अधिकारों की बहाली और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की भी मांग कर रहे हैं।

    तनाव अब भी बरकरार

    रिपोर्टों के अनुसार, पीओके के कई हिस्सों में अब भी कर्फ्यू जैसे हालात बने हुए हैं और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है, जबकि स्थानीय सामाजिक संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवीय सहायता और हस्तक्षेप की अपील की है।

    ब्रिटेन के संसदीय समूह की इस पहल के बाद माना जा रहा है कि पीओके की स्थिति को लेकर पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है और क्षेत्र में सामान्य हालात बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो सकती है।

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