
नई दिल्ली । केंद्र सरकार (Central Government) किसानों से 2125 रुपए प्रति क्विंटल की दर से (From Farmers at the rate of Rs. 2,125 Per Quintal) प्याज खरीदेगी (Will purchase Onions) । पहले यह कीमत 1,875 रुपए प्रति क्विंटल थी। नई दर शनिवार से लागू हो गई है।
सरकार का कहना है कि सरकारी खरीद मूल्य में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी के फैसले से प्याज किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए खरीद को भी मजबूती मिलेगी। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि सरकार के मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए एनएएफईडी और एनसीसीएफ के माध्यम से प्याज की खरीद जारी है। संशोधित खरीद मूल्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ बफर स्टॉक तैयार करने में भी मदद करेगा। सरकार के अनुसार, 2025-26 के लिए प्याज का उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 2024-25 के 307.67 लाख मीट्रिक टन के लगभग बराबर है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमान के आधार पर सरकार का मानना है कि देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर फिलहाल कोई चिंता की बात नहीं है। हालांकि, सामान्य मौसमी रुझान के अनुसार कीमतों में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
मंत्रालय ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में प्याज का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और फिलहाल संग्रहीत प्याज की कोई कमी नहीं है। देश भर की मंडियों में प्रतिदिन 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक प्याज की आवक हो रही है, जबकि केवल महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 30 हजार मीट्रिक टन से अधिक है, जिसमें औसत मॉडल भाव लगभग 18 रुपए प्रति किलोग्राम बना हुआ है। सरकार का कहना है कि बेहतर गुणवत्ता वाला प्याज अभी भी भंडारण में मौजूद है और इसे मांग बढ़ने वाले समय में बाजार में उतारा जाएगा। फिलहाल देश भर में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 31 रुपए प्रति किलोग्राम है। प्याज का निर्यात भी सामान्य स्तर पर बना हुआ है। जून के दौरान लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात किया गया। हालांकि, व्यापारियों का मानना है कि आने वाले कुछ समय के लिए निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन की नई फसल खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व के बाजारों में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध है।
सरकार ने बताया कि महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ प्याज की बुआई लगभग 15 दिन की देरी से चल रही है। वहीं, कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लकेरे क्षेत्र में बुआई सामान्य स्तर की लगभग 60 प्रतिशत ही हुई है। मंत्रालय के अनुसार, कुछ इलाकों में मानसून की देरी और सामान्य से कम बारिश के कारण कुछ व्यापारियों ने सट्टेबाजी के उद्देश्य से खरीद बढ़ाई है। हालांकि, प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में मौजूदा कीमतों पर मांग में कोई खास तेजी नहीं देखी जा रही है।
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