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CJI सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी के कथित गलत इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और CBI से मांगा जवाब

August 12, 2026

नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Suryakant) की करीब तीन महीने पुरानी ‘कॉकरोच’ टिप्पणी से जुड़े मामले में केंद्र सरकार (Central Government) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। मामला एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation) से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वर्चुअल कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को चुनिंदा तरीके से एडिट कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया और टिप्पणी का ऐसा अर्थ प्रस्तुत किया गया जो मूल संदर्भ से अलग था।

यह मामला 15 मई को हुई सुनवाई से जुड़ा है। उस समय CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत की प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग और वकालत के मानकों से संबंधित चर्चा हुई थी। इसी संदर्भ में फर्जी वकीलों को लेकर टिप्पणी करते हुए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस टिप्पणी के बाद अदालत की वास्तविक कार्यवाही के बजाय उसके एक हिस्से को अलग करके वीडियो क्लिप के रूप में प्रसारित किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस तरह की एडिटिंग से टिप्पणी का मूल संदर्भ बदल गया और उसे सोशल मीडिया पर अलग अर्थ के साथ पेश किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और पेशे से वकील राजा चौधरी ने पीठ के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। करीब आधे घंटे चली कार्यवाही में उन्होंने कथित तौर पर अदालत की टिप्पणियों के चुनिंदा हिस्सों को एडिट कर मीम और अन्य डिजिटल सामग्री के रूप में प्रसारित किए जाने का मुद्दा उठाया।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अदालती कार्यवाही के वीडियो और न्यायाधीशों की टिप्पणियों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि संदर्भ से अलग की गई टिप्पणियां न्यायपालिका की छवि और अदालतों में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।

मामले में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, CJI की टिप्पणी के बाद इस नाम से एक राजनीतिक समूह सामने आया था। याचिका में इस नाम और इससे जुड़ी गतिविधियों के इस्तेमाल को भी व्यापक विवाद के संदर्भ में रखा गया है।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से ऐसे मामलों की गहराई से जांच कराने और उन लोगों या संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जो कथित तौर पर अदालती टिप्पणियों का अनधिकृत या व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। याचिका में यह भी मांग की गई है कि न्यायिक कार्यवाही के चुनिंदा हिस्सों को गलत संदर्भ में प्रसारित करने की गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए व्यवस्था बनाई जाए।

इसके अलावा याचिका में ‘कॉकरोच’ शब्द और उससे जुड़े कथित ट्रेडमार्क या व्यावसायिक इस्तेमाल से संबंधित गतिविधियों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि न्यायिक टिप्पणियों को संदर्भ से काटकर व्यावसायिक सामग्री में बदला जाता है, तो इससे अदालत की कार्यवाही की गंभीरता और संस्थागत गरिमा प्रभावित हो सकती है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और CBI से इस मामले पर जवाब मांगा है। आगे की सुनवाई में अदालत के सामने यह स्पष्ट होना है कि कथित रूप से एडिट किए गए वीडियो और उनके प्रसार के संबंध में क्या कार्रवाई संभव है तथा अदालती टिप्पणियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।


  • मामला ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर अदालतों की कार्यवाही और न्यायाधीशों की टिप्पणियों के छोटे वीडियो तेजी से प्रसारित होते हैं। ऐसे में किसी टिप्पणी को उसके पूरे संदर्भ के साथ प्रस्तुत करना न्यायिक प्रक्रिया की सही समझ के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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