
नई दिल्ली: Cube Highways Trust इस महीने करीब 5,000 करोड़ रुपये का IPO लाने की तैयारी कर रहा है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, कंपनी का उद्देश्य निवेशकों का दायरा बढ़ाना और अपने यूनिट्स में लिक्विडिटी (खरीद-बिक्री) बेहतर करना है. ड्राफ्ट दस्तावेजों के अनुसार, यह पूरा IPO ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale – OFS) होगा. यानी इस इश्यू के जरिए कंपनी कोई नए शेयर या यूनिट जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
देशभर में फैला है हाईवे एसेट्स
Cube Highways Trust (Cube InvIT) भारत के अलग-अलग राज्यों में हाईवे एसेट्स का मालिक है. 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के पास 27 चालू हाईवे प्रोजेक्ट थे, जो 12 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में फैले हुए हैं. इनकी कुल लंबाई 8,754 लेन किलोमीटर है और इनकी औसत बची हुई कंसेशन अवधि 18 साल है.
वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में यूनिटहोल्डर्स को भेजे गए संदेश में CEO विनय सी. सेकर ने कहा कि ट्रस्ट की रणनीति अनुशासित अधिग्रहण (Acquisition), नियमित वितरण (Distribution), वित्तीय अनुशासन और बेहतर संचालन पर आधारित रहेगी. Cube InvIT के पोर्टफोलियो का करीब 85% हिस्सा टोल रोड परियोजनाओं का है. इनसे ट्रैफिक बढ़ने और महंगाई के अनुसार टोल दरों में संशोधन का फायदा मिलता है. वहीं, बाकी 15% हिस्सा एन्युटी एसेट्स का है, जिनसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की तय भुगतान व्यवस्था के तहत नियमित आय होती है.
निवेशकों को कितना मिला रिटर्न?
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए Cube InvIT ने प्रति यूनिट 13.77 रुपये का वितरण घोषित किया. पूरे साल में निवेशकों को कुल 1,851 करोड़ रुपये का वितरण किया गया. मार्च 2026 के अंत तक ट्रस्ट का शुद्ध कर्ज (Net Debt) 17,768 करोड़ रुपये था. वहीं, नेट डेट-टू-एंटरप्राइज वैल्यू अनुपात 46.82% रहा. इस दौरान कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 36,842 करोड़ रुपये हो गई, जिसकी बड़ी वजह वित्त वर्ष में किए गए 9 नए अधिग्रहण रहे.
आगे और विस्तार की तैयारी
Cube InvIT ने करीब 7,300 करोड़ रुपये के संयुक्त एंटरप्राइज वैल्यू वाले 4 नए हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए कमिटमेंट लेटर भी साइन किए हैं. इनके जुड़ने के बाद ट्रस्ट का पोर्टफोलियो बढ़कर 13 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में 31 हाईवे एसेट्स का हो जाएगा. इसके अलावा, ट्रस्ट ने अपने स्पॉन्सर की 3 अन्य परियोजनाओं पर राइट ऑफ फर्स्ट ऑफर (Right of First Offer) भी हासिल किया है, जिससे भविष्य में विस्तार के और अवसर मिल सकते हैं.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved