
मुंबई । सांसद सुप्रिया सुले (MP Supriya Sule) ने कहा कि एनसीपी (एसपी) (NCP (SP)) कतई एनडीए में शामिल नहीं होगी (Will absolutely not join NDA) ।
महाराष्ट्र में बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलों को खारिज करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। सुप्रिया सुले का यह स्पष्टीकरण राज्य के राजनीतिक गलियारों में कई दिनों से चल रही अटकलों के बाद आया है। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच हाल ही में हुई मुलाकात और पार्टी नेता जयंत पाटिल तथा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के बीच मुलाकात की खबरों से इन चर्चाओं को और बल मिला। इसके अलावा, कई एनसीपी (एसपी) विधायकों के पार्टी की दिशा को लेकर असहज होने की खबरों ने भी इन अटकलों को बढ़ावा दिया। अफवाहों को खारिज करने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रिया सुले ने साफ कहा, “न तो कोई हमसे बात कर रहा है और न ही हम किसी से बात कर रहे हैं। भाजपा के साथ गठबंधन का सवाल हमारी चर्चा में आया ही नहीं है।” उन्होंने कहा, “ये खबरें सिर्फ अखबारों और टीवी चैनलों तक ही सीमित हैं।”
लगातार मीडिया की छानबीन को हल्के-फुल्के अंदाज में लेते हुए बारामती सांसद ने अपने पिता से मिली एक सीख का जिक्र किया। उन्होंने हंसते हुए कहा, “शरद पवार हमेशा कहते हैं कि अगर आपके बारे में चर्चा हो रही है- चाहे अच्छे कारणों से हो या बुरे कारणों से, तो इसका मतलब है कि आपकी राजनीतिक साख अभी भी मजबूत है।” उन्होंने कहा, “पिछले कई सालों से तो मेरे कथित शपथ ग्रहण समारोहों की खबरें भी बार-बार सामने आती रही हैं।” सुप्रिया सुले ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कुछ एनसीपी (एसपी) विधायकों के असंतुष्ट होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, “हमारे सभी सांसद लगातार संपर्क में हैं। हम अक्सर मिलते हैं, रणनीति पर चर्चा करते हैं और पार्टी के भीतर किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है।”
उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दो गुटों के बीच संभावित पुनर्मिलन या विलय को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। अजित पवार ने पहले दोनों गुटों के फिर से साथ आने की इच्छा जताई थी और इस मुद्दे पर चर्चा होने की बात भी कही थी। हालांकि, सुले ने कहा कि अब यह संभावना खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा, “वह अध्याय अब बंद हो चुका है। हम अपने रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं और वे अपने रास्ते पर। फिलहाल, एनसीपी के दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही है।” इससे उन्होंने इस मुद्दे पर चल रही राजनीतिक अटकलों को खत्म करने की कोशिश की।
इससे पहले, 7 जुलाई को भी सुले ने जयंत पाटिल और भाजपा नेता विनोद तावड़े की कथित बैठक को ज्यादा राजनीतिक महत्व देने से इनकार किया था। हालांकि उन्होंने इस मुलाकात की पुष्टि नहीं की, लेकिन कहा कि अलग-अलग दलों के नेताओं का मिलना सामान्य बात है। उन्होंने बताया कि संसदीय समितियों के काम के कारण उनकी भी विनोद तावड़े और अन्य भाजपा नेताओं से नियमित मुलाकात होती रहती है। सुले ने कहा कि पिछले एक महीने में उनकी भाजपा अध्यक्ष समेत विभिन्न समिति सदस्यों से 21 से ज्यादा बार मुलाकात हुई है और ये सभी बैठकें राजनीतिक नहीं बल्कि नियमित प्रशासनिक और संसदीय कामकाज का हिस्सा थीं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी जल्द ही सत्ता में वापसी करेगी, तो सुले ने कहा कि उनकी प्राथमिकता जनता की सेवा करना है। हालांकि, उन्होंने आगे एक कठिन राजनीतिक लड़ाई के संकेत दिए। सुले ने कहा, “पिछले 12 सालों से लोग हमारे बारे में अटकलें लगा रहे हैं। अगर मौजूदा सरकार इसी तरह काम करती रही, तो एनसीपी (एसपी) और उसके सहयोगियों के पास सत्ता में वापसी के लिए कड़ा संघर्ष करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। भगवान ही जाने यह सरकार आगे क्या करेगी।”
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