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आषाढ़ मास की मासिक शिवरात्रि और रवि प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग आज, भगवान शिव की विशेष आराधना के साथ दान-पुण्य से मिलने वाला है शुभ फल

July 12, 2026

नई दिल्ली । आषाढ़ मास (Ashadha Month) का यह रविवार भगवान शिव (Lord Shiva) के भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व लेकर आया है। इस वर्ष 12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत (Ravi Pradosh Vrat) और मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) का संयोग एक ही दिन बनने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण पक्ष (Ashadha Krishna Paksha) की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है, जबकि चतुर्दशी तिथि के निशिता काल में मासिक शिवरात्रि का व्रत और विशेष पूजन किया जाता है। एक ही दिन दोनों व्रत पड़ने से इस अवसर को शिव आराधना, उपासना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और विभिन्न प्रकार की बाधाओं से राहत मिलने की कामना की जाती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं तथा बेलपत्र, धतूरा, आक और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

रवि प्रदोष व्रत का पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। इस वर्ष 12 जुलाई को प्रदोष काल का शुभ समय शाम 7:20 बजे से रात 9:30 बजे तक माना गया है। इस अवधि में शिव-पार्वती की विधिवत पूजा, दीप प्रज्ज्वलन, मंत्र जाप और आरती करने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार व्रत का पालन करते हुए भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करेंगे।

इसी दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा जाएगा। चतुर्दशी तिथि के निशिता काल में भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करने के साथ बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार मासिक शिवरात्रि की निशिता काल पूजा 13 जुलाई की मध्यरात्रि 12:07 बजे से 12:47 बजे तक की जाएगी। इस समय की गई पूजा को विशेष फलदायी माना गया है और श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का संकल्प लेते हैं।

धार्मिक मान्यताओं में इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालुओं को चावल, गेहूं और दाल जैसे अनाज का दान करने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में अन्न की कमी नहीं होती और समृद्धि बनी रहती है। सफेद मिठाइयों का दान भी शुभ माना गया है, जिसे सुख, धन और मनोकामनाओं की पूर्ति से जोड़ा जाता है।

इसके अलावा पौधों का दान पर्यावरण संरक्षण के साथ धार्मिक दृष्टि से भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे ग्रह दोषों के प्रभाव में कमी आती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है। सफेद वस्त्रों का दान भी इस अवसर पर विशेष महत्व रखता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है और परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य एवं कल्याण की कामना पूर्ण होती है।


  • आषाढ़ मास में एक ही दिन मासिक शिवरात्रि और रवि प्रदोष व्रत का यह संयोग शिव भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर माना जा रहा है। श्रद्धा, संयम, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य के माध्यम से भक्त भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने तथा अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।

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