
नई दिल्ली । राज्यसभा में (In Rajya Sabha) कई नए और पुनर्निर्वाचित सांसदों ने शपथ ग्रहण की (Several New and Re-elected MPs took Oath) ।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को विभिन्न दलों के ये निर्वाचित सदस्य, उच्च सदन के सांसद हो गए। शपथ लेने वाले सांसदों में कर्नाटक से कांग्रेस के पवन खेड़ा, पश्चिम बंगाल से भाजपा की सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय, प्रकाश चिक बाराईक शामिल हैं, वहीं मध्य प्रदेश से महेश केवट, गुजरात से डॉ. मुकेश भाई, राजस्थान से डॉ. सतीश पुनिया ने शपथ ली। सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही इन सांसदों को राज्यसभा की सदस्यता की शपथ दिलाई गई।
शपथ ग्रहण के बाद सभी सदस्यों ने राज्यसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए अपनी औपचारिक जिम्मेदारियां संभाल लीं। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वह कर्नाटक से निर्वाचित होकर पहली बार उच्च सदन में पहुंचे हैं। पार्टी की ओर से वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर सरकार के खिलाफ मुखर भूमिका निभाते रहे हैं और अब राज्यसभा में भी कांग्रेस की आवाज को मजबूती देने की जिम्मेदारी निभाएंगे।
वहीं, भाजपा की ओर से राज्यसभा पहुंचे कुछ नेताओं का राजनीतिक सफर भी चर्चा का विषय रहा। सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बाराईक पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, लेकिन बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। ये सभी सांसद पश्चिम बंगाल से निर्वाचित होकर आए हैं। इन नेताओं के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने को भाजपा के पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में राजनीतिक विस्तार के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व भी राज्यसभा में मजबूत हुआ है। मिजोरम से खियांगटे लालत्लुआंगकीमा तथा मेघालय से नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के जेम्स पगसांग ने भी सोमवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। सभी नेताओं को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण के दौरान सदन में विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। हालांकि शपथ ग्रहण की प्रक्रिया के दौरान सदन में कुछ समय के लिए राजनीतिक माहौल गर्म भी दिखाई दिया।
सुष्मिता देव और मध्य प्रदेश से निर्वाचित महेश केवट के शपथ लेने के दौरान विपक्षी दलों के कई सांसदों ने नारेबाजी की। हालांकि शपथ ग्रहण की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रही और सभी सदस्यों ने अपनी-अपनी शपथ पूरी की। राज्यसभा में नए सदस्यों के आगमन के साथ अब विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति और सदन में उनकी ताकत के समीकरणों पर भी नजर रहेगी। आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में नए सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संसद के उच्च सदन में इन नेताओं के प्रवेश से विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधित्व में व्यापक परिवर्तन हुआ है।
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