नई दिल्ली। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को दोबारा सक्रिय करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। मालदीव (Maldives) के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Mohamed Muizzu) ने सदस्य देशों से आपसी मतभेद भुलाकर संगठन को पुनर्जीवित करने की अपील की है। वहीं भारत ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए बिना नाम लिए पाकिस्तान को क्षेत्रीय सहयोग में सबसे बड़ी बाधा करार दिया।
मालदीव के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि दक्षिण एशिया के साझा विकास और शांति के लिए SAARC को फिर से सक्रिय करना जरूरी है। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे बातचीत के माध्यम से अपने मतभेद दूर करें और क्षेत्रीय सहयोग को नई गति दें।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सदस्य देश चाहें तो मौजूदा गतिरोध समाप्त कराने के लिए मालदीव मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। इस कार्यक्रम में 43 देशों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 100 से अधिक राजनयिक मौजूद थे।
मालदीव की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत हमेशा मजबूत क्षेत्रीय सहयोग का समर्थक रहा है और इसके लिए लगातार प्रयास करता आया है।
उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सभी देशों को पता है कि कौन-सा देश और कौन-सी गतिविधियां SAARC की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। उनका कहना था कि किसी भी क्षेत्रीय सहयोग की सफलता के लिए आपसी विश्वास और सद्भावना सबसे जरूरी शर्त है।
भारत ने सीधे पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन उसका इशारा सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़े मुद्दों की ओर माना जा रहा है।
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में तनाव तथा सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे के कारण SAARC की गतिविधियां लंबे समय से प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सकी हैं। संगठन में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान सदस्य देश हैं।
मालदीव से पहले बांग्लादेश भी SAARC को फिर से सक्रिय करने की वकालत कर चुका है। जुलाई में बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद ने कहा था कि संगठन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उसकी संस्थागत क्षमता मजबूत करनी होगी। उन्होंने बेहतर समन्वय, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और बैठकों के बाद फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया था।
उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि सदस्य देशों के बीच सहमति बनने पर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और विदेश मंत्रियों की विशेष बैठक बुलाने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
मालदीव और बांग्लादेश की लगातार अपीलों के बाद दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सदस्य देशों के बीच राजनीतिक विश्वास नहीं बढ़ता और सुरक्षा से जुड़े विवादों का समाधान नहीं निकलता, तब तक SAARC को पूरी तरह सक्रिय करना आसान नहीं होगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved