
नई दिल्ली । महेश भट्ट(Mahesh Bhatt) हिंदी सिनेमा(Hindi Cinema) के उन फिल्मकारों (Filmmaker)में शामिल हैं, जिन्होंने अपने करियर(Career) में अलग-अलग तरह के विषयों को पर्दे पर पेश किया। 20 सितंबर 1948 को मुंबई(Mumbai) में जन्मे महेश भट्ट आज 78वां जन्मदिन मना रहे हैं। निर्देशक, निर्माता और स्क्रीनराइटर के रूप में उनका पांच दशक से अधिक लंबा सफर रहा है।
महेश भट्ट के पिता का नाम नानाभाई भट्ट और मां का नाम शिरीन मोहम्मद अली था। उन्होंने डॉन बॉस्को हाई स्कूल, माटुंगा से पढ़ाई की। कम उम्र से ही वह अपनी मां की मदद करने लगे थे और स्कूल के दिनों में ही काम करना शुरू कर दिया था।
करीब 20 साल की उम्र में उन्होंने विज्ञापनों के लिए लिखना शुरू किया। परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए शुरू हुआ यह काम धीरे-धीरे उनके रचनात्मक सफर का हिस्सा बन गया। लेखन में रुचि और अनुभवों को व्यक्त करने की क्षमता ने उन्हें आगे सिनेमा की ओर बढ़ने में मदद की।
फिल्मी दुनिया में आने से पहले महेश भट्ट ने स्मिता पाटिल और विनोद खन्ना के सेक्रेटरी के तौर पर भी काम किया। निर्देशन के क्षेत्र में उनकी शुरुआती पहचान 1970 में आई डॉक्यूमेंट्री ‘संकट’ से बनी। इसके बाद 26 साल की उम्र में ‘मंजिलें और भी हैं’ से उन्होंने बॉलीवुड में बतौर निर्देशक शुरुआत की।
निर्देशन के साथ उनका करियर लगातार विस्तार पाता गया। 1986 में आई ‘नाम’ को उनकी पहली व्यावसायिक सिनेमाई फिल्मों में गिना जाता है। इसके बाद ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘आशिकी’, ‘डैडी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ जैसी फिल्मों ने उन्हें चर्चित फिल्मकार के रूप में स्थापित किया।
1987 में उन्होंने अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ विशेष फिल्म्स के बैनर तले ‘कब्जा’ के जरिए निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा। उनके करियर में 100 से अधिक फिल्मों की कहानियों को स्क्रीनराइटर के तौर पर आकार देने का उल्लेख मिलता है। निर्देशक और निर्माता के रूप में भी उन्होंने कई फिल्मों पर काम किया।
‘सारांश’ को 14वें मॉस्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में प्रदर्शित किया गया था। यह फिल्म उस वर्ष सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए भारत की ओर से अकादमी पुरस्कार के लिए भेजी गई थी। उनके काम को अलग-अलग मौकों पर पुरस्कार भी मिले। ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘हम हैं राही प्यार के’ और ‘जख्म’ उनके चर्चित पुरस्कारों से जुड़े कामों में शामिल हैं।
महेश भट्ट ने फिल्मों के अलावा टेलीविजन पर भी काम किया। ‘स्वाभिमान’, ‘कभी कभी’ और ‘नामकरण’ जैसे धारावाहिकों के निर्देशन से उन्होंने छोटे पर्दे पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
उनकी फिल्मों में निजी अनुभवों और समाज से जुड़े विषयों की झलक देखने को मिली। उन्होंने ऐसे विषयों पर भी फिल्में बनाईं, जिन पर उस समय खुलकर चर्चा कम होती थी। इसी वजह से उनके काम को प्रशंसा के साथ आलोचना और विवादों का सामना भी करना पड़ा।
महेश भट्ट की निजी जिंदगी भी लंबे समय तक चर्चा में रही। उनकी पहली शादी किरण भट्ट से हुई थी। दोनों के दो बच्चे पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं। बाद में उन्होंने सोनी राजदान से शादी की, जिनसे उनकी दो बेटियां आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट हैं।
महेश भट्ट की पहचान सिर्फ एक निर्देशक तक सीमित नहीं रही। लेखन से शुरू हुआ उनका सफर निर्देशन, निर्माण और टेलीविजन तक पहुंचा। फिलहाल वह ‘नाम-टू लिव इज वॉर’ को लेकर भी चर्चा में हैं। इस फिल्म में वीर पहाड़िया अहम भूमिका में हैं, जबकि निर्देशन सिद्धांत सचदेव कर रहे हैं।
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