
नई दिल्ली ।सावन मास का पावन पर्व हरियाली तीज (Hariyali Teej) वर्ष 2026 में 15 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं (Married Women) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से निर्जला व्रत (Nirjala Fast) रखती हैं तथा भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। पंचांग (Panchang) के अनुसार इस बार तिथि दो दिनों में पड़ने के कारण लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन उदया तिथि के आधार पर 15 अगस्त को ही हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 46 मिनट पर प्रारंभ होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन हरियाली तीज का पर्व मनाना शुभ माना गया है। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा का निर्णय लेने की परंपरा के कारण इस वर्ष 15 अगस्त की तिथि को मान्यता दी गई है।
हरियाली तीज के दिन कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 50 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से 3 बजकर 42 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 6 मिनट से 7 बजकर 29 मिनट तक और अमृत काल रात 8 बजकर 18 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इन शुभ समयों में पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज के व्रत में कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं प्रातः स्नान कर हरे या लाल रंग के वस्त्र धारण करती हैं और विधिवत व्रत का संकल्प लेती हैं। इस दिन काले, सफेद और भूरे रंग के वस्त्रों का प्रयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है। कई परंपराओं में व्रत के दौरान निर्जला रहने का भी विधान बताया गया है। साथ ही पूजा में मायके से प्राप्त वस्तुओं का उपयोग करना शुभ माना जाता है और निर्धारित समय से पहले व्रत का पारण नहीं किया जाता।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और समृद्धि बनी रहती है। विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा करती हैं, झूला झूलती हैं और सावन के पारंपरिक गीतों के साथ इस पर्व का उत्सव मनाती हैं। कई स्थानों पर मायके से विवाहित बेटियों को सिंधारा भेजने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे प्रेम और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
हरियाली तीज का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और सामाजिक संबंधों का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह पर्व सावन की हरियाली, प्रकृति के सौंदर्य और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है। श्रद्धा, नियम और विधि-विधान के साथ किया गया यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved