
नई दिल्ली ।फिश ऑयल (Fish Oil) कैप्सूल (Capsules) आजकल सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले हेल्थ सप्लीमेंट्स (Supplements) में शामिल हो चुका है। जिम जाने वाले लोगों से लेकर सामान्य फिटनेस (Fitness) बनाए रखने की इच्छा रखने वाले कई लोग इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सप्लीमेंट की तरह फिश ऑयल का सेवन भी बिना चिकित्सकीय सलाह के शुरू नहीं करना चाहिए। शरीर की जरूरत, स्वास्थ्य स्थिति और खानपान को ध्यान में रखकर ही इसका उपयोग करना बेहतर माना जाता है।
फिश ऑयल में ओमेगा-3 फैटी एसिड के साथ ईपीए और डीएचए जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये ऐसे फैटी एसिड हैं जिन्हें शरीर स्वयं पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाता। यही कारण है कि संतुलित मात्रा में इनका सेवन शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए लाभकारी माना जाता है। कई फिश ऑयल सप्लीमेंट्स में विटामिन ए और विटामिन डी भी मौजूद होते हैं, जो शरीर की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिश ऑयल हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। यह रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने और धमनियों में सूजन घटाने में सहायक हो सकता है। इसके नियमित और नियंत्रित सेवन से हृदय संबंधी जोखिम कारकों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि यह किसी बीमारी का विकल्प या उपचार है।
लीवर से जुड़ी कुछ स्थितियों, विशेषकर नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज में भी फिश ऑयल उपयोगी माना जाता है। कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड लीवर में जमा अतिरिक्त वसा और सूजन को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा लीवर कोशिकाओं को होने वाले नुकसान के जोखिम को कम करने में भी इसकी संभावित भूमिका बताई गई है।
हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए भी फिश ऑयल को लाभकारी माना जाता है। गठिया, जोड़ों के दर्द और अकड़न जैसी समस्याओं में कुछ लोगों को इससे राहत मिल सकती है। वहीं वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी यह संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ सहायक भूमिका निभा सकता है।
हालांकि इसके फायदे जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही जरूरी इसके संभावित नुकसान को समझना भी है। यदि कोई व्यक्ति पहले से खून पतला करने वाली दवाएं ले रहा है, तो फिश ऑयल का सेवन रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह इसे बिल्कुल नहीं लेना चाहिए।
फिश ऑयल की अधिक मात्रा लेने से अपच, गैस, पेट दर्द, मतली और उल्टी जैसी पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर शरीर में विटामिन ई का स्तर प्रभावित होने की आशंका भी जताई जाती है। जिन लोगों को मछली या समुद्री खाद्य पदार्थों से एलर्जी है, उन्हें भी इस सप्लीमेंट से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फिश ऑयल कैप्सूल हमेशा भोजन के बाद लेना चाहिए, ताकि शरीर इसे बेहतर तरीके से अवशोषित कर सके। यदि आपकी नियमित डाइट में पहले से मछली, अखरोट, अलसी या अन्य ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में शामिल हैं, तो अतिरिक्त सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं भी हो सकती। इसलिए फिश ऑयल कैप्सूल शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित और उचित विकल्प माना जाता है।
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