
नई दिल्ली। सऊदी अरब (Saudi Arabia), पाकिस्तान (Pakistan) और तुर्की (Turkiye) के बीच हाल ही में हुए रक्षा समझौते (Defence Agreements) को लेकर तस्वीर अब कुछ अलग नजर आ रही है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान (Foreign Minister Hakan Fidan) ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता ईरान (Iran) या किसी अन्य देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है। उनके इस बयान से इस गठजोड़ के उद्देश्य और आपसी रक्षा की शर्तों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
शुक्रवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का में ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक, किसी एक सदस्य देश पर होने वाला हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। इसी वजह से इसे ‘इस्लामिक NATO’ की संज्ञा दी जा रही थी।
ईरान को लेकर तुर्की ने साफ की स्थिति
तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु एजेंसी को दिए इंटरव्यू में हाकान फिदान ने कहा कि तीनों देशों के समझौते में किसी विशेष देश को साझा दुश्मन घोषित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जो देश उन पर हमला नहीं करता, उसे उनका निशाना नहीं माना जाएगा।
फिदान के इस बयान को सऊदी अरब के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि हालिया संघर्ष में ईरान की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल हमले किए गए थे। ईरान का कहना था कि उसके हमले खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे।
NATO के आर्टिकल-5 जैसा प्रावधान
तुर्की के विदेश मंत्री ने समझौते में आपसी रक्षा से जुड़ी व्यवस्था की तुलना NATO के अनुच्छेद-5 से की। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सदस्य देश पर हमला होने के बाद बाकी दोनों देशों की मदद का स्वरूप परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
उनके मुताबिक, संबंधित देश को औपचारिक रूप से मदद मांगनी होगी। इसके बाद सहायता खुफिया जानकारी साझा करने, लॉजिस्टिक सपोर्ट या जरूरत पड़ने पर सैन्य बल भेजने तक हो सकती है। मदद का स्तर खतरे की प्रकृति और उसकी गंभीरता के आधार पर तय किया जाएगा।
तुर्की ने नहीं माना किसी देश को दुश्मन
फिदान ने कहा कि समझौते में किसी साझा खतरे को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। तीनों देश तब तक किसी देश को दुश्मन नहीं मानेंगे, जब तक वह उनके खिलाफ कोई शत्रुतापूर्ण कार्रवाई नहीं करता। ऐसे में ईरान के साथ मौजूदा तनाव के बीच तुर्की का रुख सऊदी-पाकिस्तान गठजोड़ से कुछ अलग दिखाई दे रहा है।
मिस्र भी हो सकता है शामिल
तुर्की के विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ अन्य देशों ने समझौते में शामिल होने की इच्छा जताई है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन संकेत दिया कि अगले चरण में मिस्र के इस व्यवस्था से जुड़ने की उम्मीद है। समझौते के तहत तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री अपने सैन्य प्रमुखों के साथ नियमित बैठकें करेंगे। इसके अलावा सऊदी अरब में एक साझा सचिवालय स्थापित किया जाएगा, जो इस रक्षा सहयोग के समन्वय का काम करेगा।
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