मॉस्को। करीब साढ़े चार साल बाद क्या रूस-यूक्रेन जंग (Russia-Ukraine war) के फैसले का वक्त आ गया है ? क्योंकि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन (Russia-Ukraine war) ने अपने महाविनाशक हथियारों की खेप रूस भेज दी है. ये बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा रूस के इस्कंदर मिसाइलों से भी खतरनाक हैं. इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि क्या उत्तर कोरिया की रूस-यूक्रेन युद्ध में घोषित तौर पर एंट्री हो चुकी है और जंग अब चंद दिनों की बात रह गई है?
रूस-यूक्रेन युद्ध के मैदान में अब तीसरा देश उत्तर कोरिया कूद पड़ा है. खुल्लम-खुल्ला उत्तर कोरिया रूस को वो हथियार दे रहा है जो यूक्रेन की विनाशलीला की वजह बनेगी.
क्या है उत्तर कोरिया की ताकत?
उत्तर कोरिया के पास करीब 90 सैनिकों वाली मिसाइल यूनिट है, जो 120 बैलिस्टिक मिसाइलों और 6 लॉन्चर से लैस हैं. इनकी तैनाती रूस के पश्चिमी वोरोनेज क्षेत्र में की जाएगी.
लेकिन ये पहली बार होने जा रहा है कि उत्तर कोरिया की पूरी मिसाइल यूनिट रूस में तैनात होगी.
इसके पहले उत्तर कोरिया KN-23 और KN-24 बैलिस्टिक मिसाइलों की खेप रूस भेज चुका है.
और इस बार भी किम जो 120 बैलिस्टिक मिसाइलें रूस भेज रहे हैं. उनमें KN-23 और KN-24 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं. KN-24 बैलिस्टिक मिसाइलें की रेंज रूस के इस्कंदर मिसाइल से भी ज्यादा है.
KN-23 उत्तर कोरिया की एक ठोस ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइल है. ये 450 से 690 किलोमीटर तक मार कर सकती है. 500 किलोग्राम तक का वॉरहेड ले जाने में सक्षम है.
पारंपरिक या परमाणु दोनों तरह के हथियारों के लिए डिजाइन किया गया है. 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद किम जोंग उन पुतिन के करीबी सहयोगी बन गए.
दोनों देशों के बीच 2024 में आपसी रक्षा समझौता के बाद यूक्रेनी घुसपैठ को रोकने के लिए उत्तर कोरिया ने 14,000 सैनिक रूस भेजे थे. यूक्रेन के मुताबिक इस वक्त कुर्स्क में 9500 उत्तर कोरिया सैनिक मौजूद हैं.
इतना ही नहीं यूक्रेन के मुताबिक पुतिन किम जोंग उन से 30 हजार और सैनिक भेजने की अपील कर चुके हैं.
रूस के लिए निकलीं किम की मिसाइलें
आधिकारिक रूप से किम जोंग उन ने रूस को मदद देने का ऐलान नहीं किया. लेकिन इस बार रूस के खिलाफ यूक्रेन की मदद करने वाले अमेरिका को भी पता है कि किम की मिसाइलें मॉस्को के लिए निकल चुकी हैं लेकिन ट्रंप खामोश हैं.
सवाल है उत्तर कोरिया की 120 बैलिस्टिक मिसाइलें रूस जा रही है ये जानते हुए भी ट्रंप चुप क्यों हैं? इस सवाल का जवाब आगे दिखाएंगे लेकिन उसके पहले उत्तर कोरिया से पुतिन की मिसाइलें आयात करने की स्ट्रैटजी समझिए.
करीब साढ़ चार सालों की लंबी लड़ाई में पुतिन के पास हथियारों की कमी होती जा रही है.
रूस के बैलिस्टिक मिसाइलों का भंडार खाली होता जा रहा है.
उत्तर कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइलें यूक्रेन में दागने पर इसे रोकने के लिए जेलेंस्की को अमेरिकी डिफेंस सिस्टम पैट्रियट का इस्तेमाल करना होगा.यूक्रेन के पास इसकी कमी है.
पुतिन और किम जोंग उन के बीच बढ़ता सहयोग यूक्रेन की भारी तबाही की गवाही बनेगा. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस गठबंधन को लेकर चिंतित है क्योंकि ये संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन भी हो सकता है. लेकिन किम जोंग उन उत्साहित हैं क्योंकि युद्ध में साथ देने का पुतिन से किया वादा पूरा कर रहे हैं.
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