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टैरिफ के जरिए रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने का ट्रंप का दांव, भारत पर भी पड़ सकता है असर

September 23, 2026

न्यूयॉर्क। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) को खत्म कराने के लिए अमेरिका (US) अब आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार, 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में कहा कि जरूरत पड़ी तो वह पिछले सप्ताह लागू हुए नए कानून के तहत मिली टैरिफ लगाने की शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे। ट्रंप ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में हर महीने हजारों लोग मारे जा रहे हैं और अब इसे रोकने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका रूस और यूक्रेन दोनों के नेताओं के साथ संपर्क में है और युद्ध लोगों की अपेक्षा से ज्यादा तेजी से समाप्त हो सकता है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की समेत दोनों देशों के अधिकारी न्यूयॉर्क में मौजूद हैं। अमेरिका ने 18 सितंबर को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को कानून बनाया था। यह कानून रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाने और उसके साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों पर आर्थिक दबाव डालने के लिए राष्ट्रपति को नई शक्तियां देता है।

क्या है नया अमेरिकी कानून?

नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं। इसके अलावा रूस के तेल पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले शीर्ष पांच देशों या संस्थाओं को भी निशाना बनाया जा सकता है। कानून रूस के अधिकारियों, बैंकों और उसकी ‘शैडो फ्लीट’ पर भी प्रतिबंधों का प्रावधान करता है।

कानून में प्राकृतिक गैस की खरीद के मामले में कुछ सीमित छूट का प्रावधान भी है। यदि किसी देश की रूस से गैस खरीद रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है और वह अपनी निर्भरता घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, तो उस पर संबंधित टैरिफ से छूट मिल सकती है। वहीं कानून रूसी मूल के सामान पर अलग से 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की शक्ति भी देता है, हालांकि कुछ विशेष श्रेणियों, जैसे अमेरिकी परमाणु रिएक्टरों के लिए जरूरी यूरेनियम और मेडिकल आइसोटोप, को अपवाद दिया गया है।


  • भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कानून?

    अमेरिकी कानून में भारत का नाम अलग से तय देश के तौर पर नहीं लिखा गया है, लेकिन भारत और चीन रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले बड़े देशों में शामिल हैं। इसलिए राष्ट्रपति अगर कानून में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं, तो भारत भी संभावित रूप से प्रभावित हो सकता है। हालांकि कानून अपने आप भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं करता; इसके लिए अमेरिकी प्रशासन को आगे निर्णय लेना होगा।

    भारत ने अमेरिकी कानून पारित होने के बाद कहा था कि वह अपने 140 करोड़ से अधिक लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत बदलते बाजार हालात और अपनी ऊर्जा जरूरतों के आधार पर अलग-अलग स्रोतों से तेल की खरीद जारी रखेगा। साथ ही नई दिल्ली ने संकेत दिया था कि इस मामले का द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित असर भी हो सकता है।

    रूस से भारत की तेल खरीद में पहले ही आई कमी

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत की रूसी तेल खरीद में हाल के महीनों में कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो जुलाई की तुलना में 16.5 प्रतिशत कम था। सितंबर में यह करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का शुरुआती अनुमान है। इसके साथ भारतीय रिफाइनरियां मध्य-पूर्व समेत दूसरे स्रोतों से तेल खरीद बढ़ाने पर भी विचार कर रही हैं।

    क्या टैरिफ से रुक सकता है रूस-यूक्रेन युद्ध?

    ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में संकेत दिया है कि वह नए आर्थिक अधिकारों का इस्तेमाल रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। कानून के समर्थकों का तर्क है कि रूस की ऊर्जा आय पर दबाव डालकर उसकी युद्ध क्षमता और आर्थिक आधार को कमजोर किया जा सकता है। कानून के प्रायोजकों ने भी इसे रूस को बातचीत की मेज पर लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने वाला कदम बताया है।

    हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रंप प्रशासन किन देशों को निशाना बनाता है, कितनी दर से टैरिफ लगाता है और संबंधित देश इसके जवाब में क्या कदम उठाते हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए इसका असर केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

    ट्रंप ने UNGA में क्या कहा?

    ट्रंप ने अपने भाषण में रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए बातचीत और आर्थिक दबाव दोनों का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि वह रूस और यूक्रेन के नेतृत्व के साथ काम कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। ऐसे में नए कानून के तहत मिली टैरिफ शक्ति को ट्रंप प्रशासन रूस पर दबाव बढ़ाने के एक अतिरिक्त साधन के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल कब और किन देशों के खिलाफ करते हैं। भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि नई दिल्ली एक ओर अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी तेल समेत विभिन्न स्रोतों से खरीद जारी रखना चाहती है, जबकि दूसरी ओर अमेरिका के साथ व्यापार और रणनीतिक संबंध भी महत्वपूर्ण हैं।

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