
नई दिल्ली। भारत की सेपक टकरा टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। थाईलैंड में आयोजित प्रतिष्ठित किंग्स कप सेपक टकरा चैंपियनशिप के मेंस क्वाड्रेंट इवेंट में भारतीय टीम ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। भारत का सफर सेमीफाइनल तक पहुंचा जहां उसका सामना मेजबान और इस खेल की सबसे मजबूत टीमों में शामिल थाईलैंड से हुआ। तीन सेट तक चले रोमांचक मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा लेकिन सेमीफाइनल में पहुंचते ही उसका कांस्य पदक पक्का हो गया। 2026 एशियन गेम्स से पहले भारत के लिए यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने जबरदस्त शुरुआत की। टीम ने पहले सेट में शानदार तालमेल दिखाते हुए थाईलैंड को 15-9 से मात दी। शुरुआती बढ़त के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा और लगा कि टीम मेजबान को हराकर फाइनल में जगह बना सकती है। लेकिन थाईलैंड ने दूसरे सेट में रणनीति बदली और भारतीय टीम पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। मेजबान टीम ने दूसरा सेट 15-9 से अपने नाम कर मुकाबले में वापसी की। इसके बाद निर्णायक तीसरे सेट में भी थाईलैंड ने 15-9 से जीत दर्ज कर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। भारत को हार मिली लेकिन टीम ने ब्रॉन्ज मेडल के साथ अपना अभियान खत्म किया।
भारतीय खिलाड़ियों के मेडल जीतने के बाद जश्न का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा। खिलाड़ियों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ नजर आया। यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले कुछ समय में भारत ने सेपक टकरा जैसे कम लोकप्रिय लेकिन बेहद मुश्किल खेल में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है।
सेपक टकरा दक्षिण-पूर्व एशिया में लोकप्रिय खेल है और थाईलैंड तथा मलेशिया को इसकी पारंपरिक ताकत माना जाता है। भारत में क्रिकेट बैडमिंटन और फुटबॉल की तुलना में इस खेल की लोकप्रियता भले ही कम हो लेकिन भारतीय खिलाड़ी अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। सेपक टकरा को वॉलीबॉल और फुटबॉल का अनोखा मिश्रण कहा जा सकता है। इसमें खिलाड़ी हाथों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। गेंद को पैरों सिर और घुटनों की मदद से नेट के पार पहुंचाना होता है। तेज रफ्तार और हवा में उछलकर लगाए जाने वाले शानदार किक इस खेल को बेहद रोमांचक बनाते हैं।
सेपक टकरा के रेगु फॉर्मेट में एक टीम के तीन खिलाड़ी कोर्ट पर होते हैं जबकि क्वाड्रेंट फॉर्मेट में चार खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। खिलाड़ियों को बेहद शानदार संतुलन शारीरिक क्षमता और तालमेल की जरूरत होती है। कई बार खिलाड़ी हवा में ऊंची छलांग लगाकर कलाबाजी करते हुए गेंद को किक करते हैं और यही नजारा इस खेल को दर्शकों के लिए खास बनाता है।
किंग्स कप सेपक टकरा के सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शामिल है। इसकी शुरुआत 1985 में बैंकॉक में हुई थी। पहले संस्करण का खिताब मलेशिया ने जीता था लेकिन बाद में थाईलैंड ने इस प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम कर लिया। ऐसे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का सेमीफाइनल तक पहुंचना और कांस्य पदक जीतना देश में इस खेल के बढ़ते स्तर को दिखाता है।
भारत की इस सफलता की कहानी केवल किंग्स कप तक सीमित नहीं है। मार्च 2025 में पटना में आयोजित इंटरनेशनल सेपक टकरॉ फेडरेशन वर्ल्ड कप में भारत ने मेंस रेगु इवेंट में अपना पहला गोल्ड मेडल जीता था। यह भारतीय सेपक टकरा के इतिहास में बेहद अहम उपलब्धि थी और इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा।
इसके बाद 2026 में भारत ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की। मई में जापान के नागोया में आयोजित एशिया सेपक टकरा चैंपियनशिप के मेंस क्वाड्रेंट फाइनल में भारत ने मेजबान जापान को 15-10, 12-15, 15-12 से हराकर गोल्ड मेडल जीता था। इस प्रतियोगिता में भारत ने ग्रुप चरण में मलेशिया और दक्षिण कोरिया को हराया था। इसके बाद सेमीफाइनल में मजबूत थाईलैंड को सीधे सेटों में शिकस्त देकर फाइनल में जगह बनाई और फिर जापान को हराकर एशियाई चैंपियन बना।
अब किंग्स कप का ब्रॉन्ज भारतीय टीम के लिए एक और मजबूत संकेत है। 2025 का वर्ल्ड कप गोल्ड 2026 की एशियाई चैंपियनशिप का स्वर्ण और अब किंग्स कप का कांस्य यह बताता है कि भारतीय सेपक टकरा तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। अब खिलाड़ियों की नजर जापान में होने वाले 2026 एशियन गेम्स पर होगी जहां भारत इस शानदार लय को पदक में बदलने की कोशिश करेगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved