नई दिल्ली। अमेरिका और दक्षिण कोरिया (The United States and South Korea) के संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर उत्तर कोरिया (North Korea) एक बार फिर भड़क गया है। प्योंगयांग (Pyongyang) ने इन अभ्यासों को पिछले साल की तुलना में ज्यादा उकसावे वाला बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उत्तर कोरिया ने साथ ही अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत करने की चेतावनी दी है।
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया KCNA ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से कहा कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच सैन्य सहयोग तेजी से परमाणु गठजोड़ का रूप ले रहा है। प्योंगयांग का कहना है कि खतरे का स्तर बढ़ा तो वह इसका जवाब अपने ‘डिटरेंस’ यानी प्रतिरोधक क्षमता को नए स्तर तक ले जाकर देगा।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया 17 से 27 अगस्त तक अपना वार्षिक उल्ची फ्रीडम शील्ड (UFS) सैन्य अभ्यास आयोजित करने वाले हैं। इस बार अभ्यास में ड्रोन से निपटने की क्षमता, GPS व्यवधान और साइबर हमलों से मुकाबले की ट्रेनिंग को भी शामिल किया गया है।
उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। प्योंगयांग का आरोप है कि इस तरह के अभ्यास उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं और कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ाते हैं।
उत्तर कोरिया ने केवल अमेरिका और दक्षिण कोरिया को ही निशाने पर नहीं लिया, बल्कि अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया के बढ़ते सैन्य सहयोग पर भी सवाल उठाए हैं।
KCNA के मुताबिक, उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इन देशों का सैन्य सहयोग धीरे-धीरे परमाणु गठबंधन में बदल रहा है। प्योंगयांग ने चेतावनी दी कि वह इस कथित नए खतरे का जवाब अपने प्रतिरोधक बल को और मजबूत करके देगा।
उत्तर कोरिया ने अपनी न्यूक्लियर डिटरेंस को और मजबूत करने का ऐलान किया है। प्योंगयांग ने अमेरिका पर ऐसी नई परमाणु रणनीति अपनाने का आरोप लगाया है, जिससे परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की सीमा कम हो सकती है।
उत्तर कोरिया का दावा है कि इससे दुनिया और खासकर कोरियाई प्रायद्वीप परमाणु संघर्ष के और करीब पहुंच सकता है।
उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ अमेरिका के बढ़ते परमाणु सहयोग और जापान के लिए अमेरिकी ‘एक्सटेंडेड डिटरेंस’ की प्रतिबद्धता को भी निशाने पर लिया।
KCNA की टिप्पणी में कहा गया कि अमेरिका की ऐसी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं के कारण कोरियाई प्रायद्वीप कथित परमाणु रणनीति का मुख्य निशाना बन सकता है।
उत्तर कोरिया की इस चेतावनी से एक बार फिर क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया बड़े पैमाने पर संयुक्त सैन्य अभ्यास की तैयारी कर रहे हैं।
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