
इन्दौर। बारिश की बूंदें, पहाड़ों से गिरते झरने, चारों ओर पसरी हरियाली और बादलों से घिरी वादियां… ऐसे मौसम में पातालपानी-कालाकुंड (Patalpani-Kalakund) की खूबसूरती (Beauty) का मजा लेने वालों के लिए अच्छी खबर है। इस अद्भुत घाट सेक्शन (Amazing Ghat section) में एक बार फिर हेरिटेज ट्रेन (Heritage Train) दौडऩे को तैयार है। ट्रेन का पूरा रैक मरम्मत के बाद बीकानेर से ट्रेन पर सवार होकर रविवार सुबह इंदौर के लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पहुंचा है। अब इसे यहां से पातालपानी तक ले जाया जाएगा। उम्मीद है कि अगले सप्ताह से यह ट्रेन यात्रियों को लेकर वादियों की सैर पर निकल सकती है। रेलवे जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से हेरिटेज ट्रेन के रैक को महू होते हुए पातालपानी तक ले जाया जाएगा। यहां इसे क्रेन की मदद से ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद इंजन के साथ सभी डिब्बों का अलाइनमेंट होगा। इसके बाद पहले ट्रायल रन किया जाएगा। ट्रायल रन के दौरान रैक, ट्रैक और संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं के साथ सुरक्षा मानकों की जांच होगी। सब कुछ सामान्य रहा तो जल्द ही यात्री संचालन शुरू किया जाएगा। कहा जा रहा है कि अगले सप्ताह शनिवार से हेरिटेज ट्रेन फिर पातालपानी से कालाकुंड की वादियों में दौड़ती नजर आएगी।
155 साल पुरानी है इस ट्रैक की कहानी
पातालपानी-कालाकुंड का यह करीब 9.5 किलोमीटर लंबा मीटरगेज ट्रैक सिर्फ खूबसूरत ही नहीं, बल्कि इतिहास भी समेटे हुए है। इस रेल लाइन की योजना 19वीं सदी में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय ने रखी थी। वर्ष 1870 में रेल लाइन के लिए पहल हुई और 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के तहत इसका निर्माण पूरा हो गया। बाद में यह राजपूताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बना। पातालपानी स्टेशन भी इसी दौर में 1874 से 1878 के बीच बनाया गया था। समय के साथ आसपास की अधिकांश मीटरगेज लाइनें ब्रॉडगेज में बदल गईं, लेकिन पातालपानी-कालाकुंड का मुश्किल पहाड़ी हिस्सा अपनी मूल पहचान के साथ बचा रहा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इसे ब्रॉडगेज में बदलना आसान नहीं था। रेलवे ने वर्ष 2018 में इस हिस्से को संरक्षित कर हेरिटेज ट्रेन संचालन शुरू किया। पहली हेरिटेज ट्रेन 25 दिसंबर 2018 को चली थी।
चार सुरंगें, 24 तीखे मोड़ और दर्जनों पुल
छोटे से इस सफर में रोमांच की कमी नहीं है। ट्रैक पर चार सुरंगें, करीब 24 तीखे मोड़, छह बड़े और 35 छोटे पुल हैं। एक तरफ पहाड़ और घने जंगल तो दूसरी तरफ घाटियां और झरने इस सफर को खास बनाते हैं। बारिश के मौसम में पातालपानी का झरना और आसपास की हरियाली इसकी खूबसूरती और बढ़ा देती है।
पिछले साल 26 जुलाई से 16 नवंबर तक चली थी
पिछले साल भी मानसून के दौरान हेरिटेज ट्रेन का संचालन किया गया था। यह 26 जुलाई से 16 नवंबर 2025 तक हर शुक्रवार से रविवार तक संचालित की गई थी। इस साल रैक की मरम्मत में समय लगने के कारण इसका संचालन भी लेट हो रहा है।
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