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झारखंड परीक्षा विवाद: रद्द फैसले पर कोर्ट का स्टे, आंदोलन पर अड़े छात्र

August 21, 2026

रांची: झारखंड में राज्य सरकार द्वारा रद्द की गई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर घमासान और तेज हो गया है. झारखंड हाईकोर्ट द्वारा 11वीं-13वीं JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) परीक्षा रद्द करने के सरकारी आदेश पर ‘स्टे’ (रोक) लगाए जाने के बाद राज्य का सियासी और छात्र आंदोलन का माहौल पूरी तरह गरमा गया है. एक तरफ जहां चयनित अभ्यर्थियों को अदालत से बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार पर फिक्सिंग और धोखेबाजी का आरोप लगाते हुए उग्र आंदोलन और राज्यव्यापी उलगुलान की चेतावनी दी है.

11वीं से 13वीं JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर की परीक्षा रद्द करने के सोरेन सरकार के फैसले के खिलाफ दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 20 अगस्त को बड़ा आदेश दिया.

अदालत ने राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई की तिथि 15 सितंबर तय की गई है. फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और न्यायालय से उन्हें न्याय मिला है.

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच से जुड़े आंदोलनकारी छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनरत रहे छात्रों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. छात्रों का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर कमजोर पैरवी की. कोर्ट में सरकार के अधिवक्ता यह स्पष्ट तर्क या संतोषजनक तथ्य पेश नहीं कर पाए कि परीक्षाएं क्यों रद्द की गईं.


  • छात्रों ने कहा कि 22 परीक्षाओं को रद्द करने और 23 परीक्षाओं की सीआईडी जांच की घोषणा केवल छात्रों के उग्र आंदोलन को समाप्त कराने की एक साजिश थी. आक्रोशित छात्रों ने आज (21 अगस्त) झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने का ऐलान किया है.

    दूसरी ओर, JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले के विरोध में चयनित होकर काम कर रहे लगभग 1932 अभ्यर्थी पिछले तीन दिनों से भारी बारिश के बीच रांची में डटे हुए हैं. 20 अगस्त की देर रात एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई, जहां प्रोजेक्ट भवन (झारखंड मंत्रालय) के बाहर विरोध जता रहे दर्जनों सेवामुक्त कर्मियों ने सड़क पर ही सोकर रात काटी. इससे पहले मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई. अभ्यर्थियों ने गले में फंदा डालकर “न्याय दो या फांसी दो!” और “जेएसएससी सीजीएल रद्द करने का फैसला वापस लो” के नारे लगाए.

    प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों की कड़ी मेहनत और मेरिट के दम पर चयनित हुए थे. लगभग 500 से 600 अभ्यर्थी रेलवे, सेंट्रल जीएसटी, डाक विभाग और आईटी डिपार्टमेंट जैसी केंद्र सरकार की नौकरियां छोड़कर अपने राज्य में सेवा देने आए थे.

    अभ्यर्थियों ने नियुक्ति पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उसमें स्पष्ट लिखा है कि यदि जांच के दौरान कोई व्यक्ति व्यक्तिगत तौर पर गड़बड़ी में शामिल पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई होगी, न कि पूरी परीक्षा रद्द की जाएगी. अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार धांधली करने वालों को चिन्हित कर उन पर कार्रवाई करे, न कि मेरिट वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करे.

    बता दें कि JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों ने भी परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं. इसके अलावा आज (21 अगस्त) हाईकोर्ट में CDPO परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर भी सुनवाई होनी है.

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