
नई दिल्ली ।बारिश के मौसम में मच्छरों (Mosquitoes) से होने वाली बीमारियों (Diseases) का खतरा बढ़ जाता है। जुलाई से अक्तूबर के बीच डेंगू (Dengue) और मलेरिया जैसे संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। डेंगू की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसी ही दिखाई देती है, इसलिए मरीज और परिवार के लोग शुरुआती लक्षणों (Symptoms) को नजरअंदाज कर देते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, जी मिचलाना और उल्टी जैसी शिकायतें डेंगू में देखी जा सकती हैं। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच (Medical Examination) कराना जरूरी होता है।
डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। बारिश के बाद घरों और आसपास जमा साफ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है। ऐसे में पानी जमा होने वाली जगहों की नियमित सफाई और मच्छरों से बचाव के उपाय बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। दिन के समय भी मच्छरों से बचने के लिए शरीर को ढककर रखना और आवश्यकता के अनुसार मच्छररोधी उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है।
डेंगू के मरीज में कमजोरी और शरीर में दर्द होना आम लक्षण हो सकते हैं, लेकिन अगर कमजोरी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए और मरीज को उठने-बैठने में परेशानी होने लगे तो इसे सामान्य मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। अत्यधिक सुस्ती, बेचैनी या तेजी से बिगड़ती तबीयत भी चिकित्सकीय मदद लेने का संकेत हो सकती है।
तेज बुखार के साथ पेट में गंभीर दर्द या पेट दबाने पर अधिक दर्द होना भी चिंता का कारण है। डेंगू के गंभीर मामलों में शरीर में तरल संतुलन और रक्तसंचार से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार पेट दर्द या असामान्य बेचैनी होने पर डॉक्टर से तत्काल संपर्क करना जरूरी है।
सांस सामान्य से बहुत तेज चलना या सांस लेने में परेशानी होना भी गंभीर संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को घर पर केवल सामान्य बुखार समझकर इलाज करते रहना उचित नहीं है। चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्थिति की गंभीरता और आवश्यक उपचार तय किया जा सकता है।
नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी में खून दिखाई देना अथवा मल में रक्त आना भी डेंगू के गंभीर चेतावनी संकेतों में शामिल हो सकते हैं। बुखार के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। अत्यधिक रक्तस्राव गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
डेंगू के इलाज में आमतौर पर लक्षणों को नियंत्रित करने, शरीर में पर्याप्त तरल बनाए रखने और जटिलताओं की निगरानी पर ध्यान दिया जाता है। बुखार या दर्द के लिए दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। तेज बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करना अधिक सुरक्षित है।
बरसात में डेंगू से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमले, टंकियों और अन्य पात्रों की नियमित सफाई करें तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। बुखार आने पर पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन गंभीर चेतावनी संकेत दिखाई देने पर घरेलू देखभाल तक सीमित रहना उचित नहीं है। समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच से स्थिति को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।